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Lahiri
Premium sampleकर्म / पेशा रिपोर्ट
नौकरी या व्यवसाय
दशम भाव निर्बल है (अंक 26)। दशमेश शुक्र भाव 2 में, नीच। इस कुण्डली में कर्म की प्रवृत्ति नौकरी / सेवा है। षष्ठ भाव (सेवा-रोग-प्रतिद्वन्द्व) दशम के साथ अधिक पुष्ट है। षष्ठ सेवा-क्षेत्र है, सप्तम साझेदारी/व्यवसाय।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कर्मभाव · भावेशफल · कारकत्व
- फल
- दशम भाव निर्बल है (अंक 26)। दशमेश शुक्र भाव 2 में, नीच। इस कुण्डली में कर्म की प्रवृत्ति नौकरी / सेवा है। षष्ठ भाव (सेवा-रोग-प्रतिद्वन्द्व) दशम के साथ अधिक पुष्ट है। षष्ठ सेवा-क्षेत्र है, सप्तम साझेदारी/व्यवसाय।
- प्रवृत्ति
- नौकरी / सेवा
- स्रोत
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कर्मभाव · भावेशफल · कारकत्व
उपयुक्त क्षेत्र
दशमेश शुक्र के स्वाभाविक कर्म-क्षेत्र: कला, सौन्दर्य, वाहन, सुख-उद्योग · राजकार्य, प्रशासन, चिकित्सा, नेतृत्व · श्रम, सेवा, खनिज, दीर्घ संस्थान। दशम में ग्रह: रिक्त। सूर्य मान-कीर्ति, शनि श्रम-सेवा, बुध आजीविका-वाणी के कारक हैं। यह प्रवृत्ति है, नियत पद नहीं।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कर्मभाव · भावेशफल · कारकत्व · कारक
- फल
- दशमेश शुक्र के स्वाभाविक कर्म-क्षेत्र: कला, सौन्दर्य, वाहन, सुख-उद्योग · राजकार्य, प्रशासन, चिकित्सा, नेतृत्व · श्रम, सेवा, खनिज, दीर्घ संस्थान। दशम में ग्रह: रिक्त। सूर्य मान-कीर्ति, शनि श्रम-सेवा, बुध आजीविका-वाणी के कारक हैं। यह प्रवृत्ति है, नियत पद नहीं।
- क्षेत्र
- कला, सौन्दर्य, वाहन, सुख-उद्योग · राजकार्य, प्रशासन, चिकित्सा, नेतृत्व · श्रम, सेवा, खनिज, दीर्घ संस्थान
- स्रोत
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कर्मभाव · भावेशफल · कारकत्व · कारक
दशम भाव और दशमेश
दशम राशि वृषभ, भावेश शुक्र (नीच), SAV 37 (क्रम 1)। कारक सूर्य भाव 1 में। अष्टकवर्ग दशम की सापेक्ष शक्ति बताता है — 30+ कटऑफ नहीं।
BPHS कर्मभाव २१ · भावेशफल २४ · अष्टकवर्ग
- फल
- दशम राशि वृषभ, भावेश शुक्र (नीच), SAV 37 (क्रम 1)। कारक सूर्य भाव 1 में। अष्टकवर्ग दशम की सापेक्ष शक्ति बताता है — 30+ कटऑफ नहीं।
- दशमेश
- शुक्र · भाव 2 · नीच · SAV 37
- स्रोत
- BPHS कर्मभाव २१ · भावेशफल २४ · अष्टकवर्ग
आय और वृद्धि
आय धन (2) और लाभ (11) से पढ़ी जाती है। द्वितीय निर्बल (SAV क्रम 5), एकादश निर्बल (SAV क्रम 2)। षष्ठ मिश्र सेवा/प्रतिद्वन्द्व और ऋण-पक्ष है। वृद्धि उपचय (३/६/१०/११) के बल से धीरे पकती है।
BPHS धन १३ · लाभ २२ · अरि १७
- फल
- आय धन (2) और लाभ (11) से पढ़ी जाती है। द्वितीय निर्बल (SAV क्रम 5), एकादश निर्बल (SAV क्रम 2)। षष्ठ मिश्र सेवा/प्रतिद्वन्द्व और ऋण-पक्ष है। वृद्धि उपचय (३/६/१०/११) के बल से धीरे पकती है।
- स्रोत
- BPHS धन १३ · लाभ २२ · अरि १७
वर्तमान दशा
वर्तमान बुध–बुध कर्म-भावों 2, 11, 6 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–बुध · फलदीपिका (बल/राशि)
- फल
- वर्तमान बुध–बुध कर्म-भावों 2, 11, 6 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
- स्रोत
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–बुध · फलदीपिका (बल/राशि)
कर्म-समय
आने वाले अनुकूल कर्म-खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-08-15–2028-11-21) · केतु–मंगल (2034-07-21–2034-12-17) · केतु–बृहस्पति (2036-01-05–2036-12-11)। इन अवधियों में दशम/लाभ/सेवा के स्वामी चलते हैं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
BPHS दशा of bhāva-lords · विम्शोत्तरी
- फल
- आने वाले अनुकूल कर्म-खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-08-15–2028-11-21) · केतु–मंगल (2034-07-21–2034-12-17) · केतु–बृहस्पति (2036-01-05–2036-12-11)। इन अवधियों में दशम/लाभ/सेवा के स्वामी चलते हैं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
- स्रोत
- BPHS दशा of bhāva-lords · विम्शोत्तरी
कर्म योग
उभयाचारीयोगः शुभकर्तरीयोगः हर्षयोगः सरलयोगः नीचभङ्गराजयोगः
दशमेश शुक्र षड्बल पर्याप्त। सूर्य पर्याप्त · शनि प्रबल · बुध सीमांत
कर्म-समय (दशम / षष्ठ / धन / लाभ)
| दशा | अवधि | बल | भाव |
|---|---|---|---|
| बुध–बुध | 2026-08-22 – 2027-05-28 | दुर्बल | 2, 11, 6 |
| बुध–केतु | 2027-05-28 – 2027-09-21 | तनाव | 2, 11, 6 |
| बुध–शुक्र | 2027-09-21 – 2028-08-15 | दुर्बल | 10, 2, 11, 6 |
| बुध–सूर्य | 2028-08-15 – 2028-11-21 | बलवान | 2, 11, 6 |
| बुध–चन्द्र | 2028-11-21 – 2029-05-05 | दुर्बल | 10, 2, 11, 6 |
| बुध–मंगल | 2029-05-05 – 2029-08-28 | तनाव | 11, 2, 6 |
| बुध–राहु | 2029-08-28 – 2030-06-20 | तनाव | 2, 11, 6 |
| बुध–बृहस्पति | 2030-06-20 – 2031-03-11 | तनाव | 6, 2, 11 |
| बुध–शनि | 2031-03-11 – 2032-01-17 | दुर्बल | 6, 10, 2, 11 |
| केतु–शुक्र | 2032-06-14 – 2033-08-14 | दुर्बल | 10, 2 |
| केतु–चन्द्र | 2033-12-20 – 2034-07-21 | दुर्बल | 10 |
| केतु–मंगल | 2034-07-21 – 2034-12-17 | बलवान | 11, 2, 6 |
| केतु–बृहस्पति | 2036-01-05 – 2036-12-11 | बलवान | 6 |
शास्त्र — बृहत्पाराशर होराशास्त्र
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