तिथि
उदयकालिक: त्रयोदशी (जया तिथि)
पूर्णता: 95.88%
परिवर्तन:
- त्रयोदशी → चतुर्दशी 06:47:17
सूर्यसिद्धान्त · आचार्य राजेश बेंजवाल · बुधवार · 2026-08-26 · देहरादून
परिवर्तन: अमान्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सूर्योदय (2026-03-20 06:27:28 IST)
उदयकालिक: त्रयोदशी (जया तिथि)
पूर्णता: 95.88%
परिवर्तन:
वर्तमान: श्रवण
पाद: 2
परिवर्तन:
उदयकालिक: सौभाग्य
पूर्णता: 85.62%
परिवर्तन:
उदयकालिक: तैतिल
पूर्णता: 91.75%
परिवर्तन:
☉ सूर्य उदय 05:44 · अस्त 18:37 · मध्य 12:11
☽ चन्द्र उदय 17:45 · अस्त 03:40 · मध्य —
दिनमान: 32.21 घटी · रात्रिमान: 27.79 घटी
🌙 चन्द्र - अग्निचक्र चन्द्र में होने से यज्ञादि कर्म लाभदायक
पाताल
05:44 (2026-08-26) – 05:44
🐂 वृषारूढ़ - अभीष्ट सिद्धि
राहुकाल: 12:10 – 13:47
गुलिककाल: 10:33 – 12:10
यमकण्टक: 07:20 – 08:57
कोई योग नहीं
सर्वार्थसिद्धि योग नहीं है
आरंभ: 05:44 2026-08-26
समाप्ति: 05:44 2026-08-27
अमृतसिद्धि योग नहीं है
ब्रह्ममुहूर्त 04:15 – 04:59 44 minutes
गोधूली वेला 05:32 – 05:56 (24 मिनट)
अभिजितमुहूर्त 11:44 – 12:36 52 minutes
बाधक वार: बुधवार
दिन:
पूर्वाह्न: 05:44–08:57मध्याह्न: 08:57–12:10अपराह्न: 12:10–15:23सांयकाल: 15:23–18:37रात्रि:
प्रदोष: 18:37–21:23निशीथ: 21:23–00:10त्रियामा: 00:10–02:57उषा: 02:57–05:44शुक्र: Asta: 2026-10-04 (7.74°)Uday: 2026-10-14 (8.55°)
बृहस्पति: Asta: 2027-08-23 (10.33°)Uday: 2027-09-21 (11.38°)
आज दिशाशूल नहीं
भिन्नायन · वध
नैर्ऋत्य
भद्रा नहीं है।
| ग्रह | मध्यम | स्फुट | राशि | अवस्था | नक्षत्र | गति | भाव | स्थान | दृश्य | युद्ध |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ☉ सूर्य | 129.6877° | 127.9555° | सिंह 7.96° | कुमार | मघा · पाद 3 | मार्गी | 1 | स्वक्षेत्र | — | — |
| ☽ चन्द्र | 286.5152° | 283.4607° | मकर 13.46° | युवा | श्रवण · पाद 2 | मार्गी | 6 | — | उदय | — |
| ♂ मंगल | 30.4211° | 73.8579° | मिथुन 13.86° | युवा | आर्द्रा · पाद 3 | मार्गी | 11 | — | उदय | — |
| ☿ बुध | 129.6830° | 127.0297° | सिंह 7.03° | कुमार | मघा · पाद 3 | मार्गी | 1 | — | अस्त · दग्ध | — |
| ♃ बृहस्पति | 103.9286° | 111.9191° | कर्क 21.92° | कुमार | आश्लेषा · पाद 2 | मार्गी | 12 | उच्च | उदय | — |
| ♀ शुक्र | 129.6830° | 170.9932° | कन्या 20.99° | कुमार | हस्त · पाद 4 | मार्गी | 2 | नीच | उदय | — |
| ♄ शनि | 345.5779° | 341.5857° | मीन 11.59° | वृद्ध | उत्तर भाद्रपद · पाद 3 | वक्री | 8 | — | उदय | — |
| ☊ राहु | 309.3426° | 309.3426° | कुम्भ 9.34° | — | शतभिषा · पाद 1 | वक्री | 7 | — | — | — |
| ☋ केतु | 129.3426° | 129.3426° | सिंह 9.34° | — | मघा · पाद 3 | वक्री | 1 | — | — | — |
मध्यम अध्याय १ · स्फुट अध्याय २ · अवस्था बालादि (राशि-अंश, दृक् समान सूत्र) · अस्त/उदय अध्याय ९ अस्तांश से (दृक्कर्म नहीं) · उदय-अस्त घड़ी केवल रवि-चन्द्र (अध्याय ३)।
| नाम | समय |
|---|---|
| रुद्रअशुभ | 05:44–06:35 |
| अहिअशुभ | 06:35–07:27 |
| मित्रशुभ | 07:27–08:18 |
| पितृअशुभ | 08:18–09:10 |
| वसुशुभ | 09:10–10:01 |
| वाराहशुभ | 10:01–10:53 |
| विश्वदेवशुभ | 10:53–11:44 |
| अभिजितत्याज्य | 11:44–12:36 |
| सतमुखीअशुभ | 12:36–13:27 |
| पुरुहुतअशुभ | 13:27–14:19 |
| वाहिनीअशुभ | 14:19–15:10 |
| नैर्ऋतिअशुभ | 15:10–16:02 |
| वरुणशुभ | 16:02–16:53 |
| अर्यमाशुभ | 16:53–17:45 |
| भगअशुभ | 17:45–18:37 |
| नाम | समय |
|---|---|
| गिरीशअशुभ | 18:37–19:21 |
| अजपादअशुभ | 19:21–20:05 |
| अहिरबुध्न्यशुभ | 20:05–20:50 |
| पुष्णवशुभ | 20:50–21:34 |
| अश्विनीशुभ | 21:34–22:19 |
| यमअशुभ | 22:19–23:03 |
| अग्निशुभ | 23:03–23:48 |
| विधाताशुभ | 23:48–00:32 |
| कण्डशुभ | 00:32–01:17 |
| अदितिशुभ | 01:17–02:01 |
| अमृतशुभ | 02:01–02:46 |
| विष्णुशुभ | 02:46–03:30 |
| अर्कशुभ | 03:30–04:15 |
| ब्रह्मशुभ | 04:15–04:59 |
| समुद्रशुभ | 04:59–05:44 |
मुख्य संकल्प
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः नमः परमात्मने पुरुषोत्तमाय ॐ तत्सत् अद्यैतस्य विष्णोराज्ञया जगत्सृष्टिकर्मणि प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे तत्प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे विष्णुप्रजापतिक्षेत्रे उत्तराखण्ड प्रदेशान्तर्गत देहरादून जिलान्तर्गत देहरादून स्थाने बौद्धावतारे रौद्र नाम संवत्सरे 2083 विक्रमाब्दे 1948 शकाब्दे दक्षिणायने वर्षा ऋतौ श्रावणमासे शुक्लपक्षे मकरराशिस्थिते चन्द्रे सिंहराशिस्थिते सूर्ये कर्कराशिस्थिते देवगुरौ मिथुनराशिस्थिते भौमे सिंहराशिस्थिते बुधे कन्याराशिस्थिते शुक्रे मीनराशिस्थिते शनौ कुम्भराशिस्थिते राहौ सिंहराशिस्थिते केतौ सर्वेषु ग्रहेषु यथास्वं राशि स्थितेषु सत्सु एवं ग्रहगण विशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ त्रयोदश्यां तिथौ बुधवासरे श्रवण नाम नक्षत्रे सौभाग्य योगे तैतिल करणे _______ गोत्रोत्पन्न _______ शर्मा/वर्मा/गुप्तोऽहं ममात्मनः सर्वारिष्टनिरसनपूर्वक सर्वपापक्षयार्थं मनसेप्सितफलप्राप्तिपूर्वक—श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्त्यर्थं दीर्घायुरारोग्यैश्वर्यादिवृद्ध्यर्थं श्रीसाम्बसदाशिवप्रीत्यर्थञ्च लिङ्गोपरि यथोपचारैः श्रीसाम्बसदाशिवपूजनपूर्वकं जलधारया षडङ्गरुद्रेण/रुद्रैकादशिन्या/लघुरुद्रेण रुद्राभिषेकं _______ गोत्रोत्पन्न _______ शर्मणा ब्राह्मणद्वारा कारयिष्ये वा स्वयं कर रहे हों तो अहं करिष्ये कहकर हाथका सङ्कल्पजल आदि छोड़ दे।
गणपति संकल्प
पुनः हाथमें जल, अक्षत, पुष्प तथा कुश लेकर बोले— तदङ्गत्वेन कार्यस्य निर्विघ्नतया सिद्धयर्थं श्रीसिद्धलक्ष्मीसहितमहागणपतिदेवता प्रीत्यर्थञ्च आदौ श्रीसिद्धलक्ष्मीसहित महागणपतिदेवतायाः पूजनं करिष्ये, कहकर हाथका जल आदि छोड़ दे।