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Engine

Sample identity

Prefill · cannot be changedEnterprise subscription वाले स्थान और वर्ष बदल सकते हैं कुण्डली PDF
NameDevadutt
LocationDehradun
Date2026-08-22
Time06:15 IST

API

Career · Sūrya-siddhānta

GET /v1/vedic/career-report?date=2026-08-22&time=06:15&place=Dehradun&engine=surya

Sūrya-siddhānta (nirayana)

Premium sample
North Indian
05 06 07 08 09 10 11 12 01 02 03 04 Su Mo Ma Me Ju Ve Sa Ra Ke Sorry, your browser does not support inline SVG.

कर्म / पेशा रिपोर्ट

लग्नसिंहमिश्र
दशमेशशुक्रभाव 2 · नीच
प्रवृत्तिनौकरी / सेवानौकरी या व्यवसाय
दशाबुध–बुधमहा / अन्तर

नौकरी या व्यवसाय

दशम भाव निर्बल है (अंक 26)। दशमेश शुक्र भाव 2 में, नीच। इस कुण्डली में कर्म की प्रवृत्ति नौकरी / सेवा है। षष्ठ भाव (सेवा-रोग-प्रतिद्वन्द्व) दशम के साथ अधिक पुष्ट है। षष्ठ सेवा-क्षेत्र है, सप्तम साझेदारी/व्यवसाय।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कर्मभाव · भावेशफल · कारकत्व

फल
दशम भाव निर्बल है (अंक 26)। दशमेश शुक्र भाव 2 में, नीच। इस कुण्डली में कर्म की प्रवृत्ति नौकरी / सेवा है। षष्ठ भाव (सेवा-रोग-प्रतिद्वन्द्व) दशम के साथ अधिक पुष्ट है। षष्ठ सेवा-क्षेत्र है, सप्तम साझेदारी/व्यवसाय।
प्रवृत्ति
नौकरी / सेवा
स्रोत
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कर्मभाव · भावेशफल · कारकत्व

उपयुक्त क्षेत्र

दशमेश शुक्र के स्वाभाविक कर्म-क्षेत्र: कला, सौन्दर्य, वाहन, सुख-उद्योग · राजकार्य, प्रशासन, चिकित्सा, नेतृत्व · श्रम, सेवा, खनिज, दीर्घ संस्थान। दशम में ग्रह: रिक्त। सूर्य मान-कीर्ति, शनि श्रम-सेवा, बुध आजीविका-वाणी के कारक हैं। यह प्रवृत्ति है, नियत पद नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कर्मभाव · भावेशफल · कारकत्व · कारक

फल
दशमेश शुक्र के स्वाभाविक कर्म-क्षेत्र: कला, सौन्दर्य, वाहन, सुख-उद्योग · राजकार्य, प्रशासन, चिकित्सा, नेतृत्व · श्रम, सेवा, खनिज, दीर्घ संस्थान। दशम में ग्रह: रिक्त। सूर्य मान-कीर्ति, शनि श्रम-सेवा, बुध आजीविका-वाणी के कारक हैं। यह प्रवृत्ति है, नियत पद नहीं।
क्षेत्र
कला, सौन्दर्य, वाहन, सुख-उद्योग · राजकार्य, प्रशासन, चिकित्सा, नेतृत्व · श्रम, सेवा, खनिज, दीर्घ संस्थान
स्रोत
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कर्मभाव · भावेशफल · कारकत्व · कारक

दशम भाव और दशमेश

दशम राशि वृषभ, भावेश शुक्र (नीच), SAV 37 (क्रम 1)। कारक सूर्य भाव 1 में। अष्टकवर्ग दशम की सापेक्ष शक्ति बताता है — 30+ कटऑफ नहीं।

BPHS कर्मभाव २१ · भावेशफल २४ · अष्टकवर्ग

फल
दशम राशि वृषभ, भावेश शुक्र (नीच), SAV 37 (क्रम 1)। कारक सूर्य भाव 1 में। अष्टकवर्ग दशम की सापेक्ष शक्ति बताता है — 30+ कटऑफ नहीं।
दशमेश
शुक्र · भाव 2 · नीच · SAV 37
स्रोत
BPHS कर्मभाव २१ · भावेशफल २४ · अष्टकवर्ग

आय और वृद्धि

आय धन (2) और लाभ (11) से पढ़ी जाती है। द्वितीय निर्बल (SAV क्रम 5), एकादश निर्बल (SAV क्रम 2)। षष्ठ मिश्र सेवा/प्रतिद्वन्द्व और ऋण-पक्ष है। वृद्धि उपचय (३/६/१०/११) के बल से धीरे पकती है।

BPHS धन १३ · लाभ २२ · अरि १७

फल
आय धन (2) और लाभ (11) से पढ़ी जाती है। द्वितीय निर्बल (SAV क्रम 5), एकादश निर्बल (SAV क्रम 2)। षष्ठ मिश्र सेवा/प्रतिद्वन्द्व और ऋण-पक्ष है। वृद्धि उपचय (३/६/१०/११) के बल से धीरे पकती है।
स्रोत
BPHS धन १३ · लाभ २२ · अरि १७

वर्तमान दशा

वर्तमान बुध–बुध कर्म-भावों 2, 11, 6 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–बुध · फलदीपिका (बल/राशि)

फल
वर्तमान बुध–बुध कर्म-भावों 2, 11, 6 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
स्रोत
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–बुध · फलदीपिका (बल/राशि)

कर्म-समय

आने वाले अनुकूल कर्म-खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) · केतु–बृहस्पति (2036-06-22–2037-05-29)। इन अवधियों में दशम/लाभ/सेवा के स्वामी चलते हैं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।

BPHS दशा of bhāva-lords · विम्शोत्तरी

फल
आने वाले अनुकूल कर्म-खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) · केतु–बृहस्पति (2036-06-22–2037-05-29)। इन अवधियों में दशम/लाभ/सेवा के स्वामी चलते हैं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
स्रोत
BPHS दशा of bhāva-lords · विम्शोत्तरी

कर्म योग

उभयाचारीयोगः शुभकर्तरीयोगः हर्षयोगः सरलयोगः नीचभङ्गराजयोगः

दशमेश शुक्र षड्बल पर्याप्त। सूर्य पर्याप्त · शनि प्रबल · बुध सीमांत

कर्म-समय (दशम / षष्ठ / धन / लाभ)

दशाअवधिबलभाव
बुध–बुध2026-08-22 – 2027-06-21दुर्बल2, 11, 6
बुध–केतु2027-06-21 – 2027-10-24तनाव2, 11, 6
बुध–शुक्र2027-10-24 – 2028-10-16दुर्बल10, 2, 11, 6
बुध–सूर्य2028-10-16 – 2029-01-31बलवान2, 11, 6
बुध–चन्द्र2029-01-31 – 2029-07-29दुर्बल10, 2, 11, 6
बुध–मंगल2029-07-29 – 2029-12-01तनाव11, 2, 6
बुध–राहु2029-12-01 – 2030-10-18तनाव2, 11, 6
बुध–बृहस्पति2030-10-18 – 2031-07-31तनाव6, 2, 11
बुध–शनि2031-07-31 – 2032-07-04दुर्बल6, 10, 2, 11
केतु–शुक्र2032-11-30 – 2034-01-31दुर्बल10, 2
केतु–चन्द्र2034-06-07 – 2035-01-06दुर्बल10
केतु–मंगल2035-01-06 – 2035-06-05बलवान11, 2, 6
केतु–बृहस्पति2036-06-22 – 2037-05-29बलवान6

शास्त्र — बृहत्पाराशर होराशास्त्र

BPHS Karma-bhāva (10th) is the seat of livelihood, rank, and public work. Results are read from the bhāva, its lord, occupants, and the Sun as kāraka — not from a stock profession list alone.
BPHS Karma-bhāva (often printed as ch. 21; English paraphrase)
Bhāveśaphala: the 10th lord’s dignity and the house he occupies show where karma ripens. A strong lord in kendra/trikoṇa supports status; dusthāna or nīca strains it.
BPHS Bhāveśaphala 24 (method; English paraphrase)
Sthira kārakas colour the same houses: Sun—self and honour; Saturn—labour and service; Mercury—livelihood and speech.
BPHS Kārakatwa 32 (English paraphrase of the usual sthira list)
The daśā of a bhāva-lord activates that bhāva. Career windows are the mahā–antar periods whose lords own, occupy, or aspect the 10th, 6th, 2nd, or 11th.
BPHS daśā of bhāva-lords (English paraphrase)

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