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Engine

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Prefill · cannot be changedEnterprise subscription वाले स्थान और वर्ष बदल सकते हैं कुण्डली PDF
NameDevadutt
LocationDehradun
Date2026-08-22
Time06:15 IST

API

Children · Sūrya-siddhānta

GET /v1/vedic/children-report?date=2026-08-22&time=06:15&place=Dehradun&engine=surya

Sūrya-siddhānta (nirayana)

Premium sample
North Indian
05 06 07 08 09 10 11 12 01 02 03 04 Su Mo Ma Me Ju Ve Sa Ra Ke Sorry, your browser does not support inline SVG.

सन्तान / परिवार रिपोर्ट

लग्नसिंहमिश्र
पञ्चमेशबृहस्पतिभाव 12 · उच्च
धनेशबुधकुटुम्ब
दशाबुध–बुधमहा / अन्तर

सन्तान की सम्भावना

पञ्चम भाव मिश्र (अंक 51), SAV क्रम 7। पञ्चमेश बृहस्पति भाव 12 में, उच्च (षड्बल पर्याप्त)। गुरु भाव 12 (षड्बल पर्याप्त)। पञ्चम में ग्रह: रिक्त। यह सन्तान-समर्थन है, गिनती या लिंग नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · पुत्रभाव (प्रचलित recension में ~अ. १६) · पञ्चम + पञ्चमेश + गुरु — सन्तान-क्षमता, गिनती/लिंग नहीं

फल
पञ्चम भाव मिश्र (अंक 51), SAV क्रम 7। पञ्चमेश बृहस्पति भाव 12 में, उच्च (षड्बल पर्याप्त)। गुरु भाव 12 (षड्बल पर्याप्त)। पञ्चम में ग्रह: रिक्त। यह सन्तान-समर्थन है, गिनती या लिंग नहीं।
पञ्चमेश
बृहस्पति · भाव 12 · उच्च · SAV 28
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
पुत्रभाव (प्रचलित recension में ~अ. १६)
विधि
पञ्चम + पञ्चमेश + गुरु — सन्तान-क्षमता, गिनती/लिंग नहीं

सन्तान-स्वभाव

पञ्चमेश बृहस्पति से स्वभाव-संकेत: धार्मिक, गुरु-स्वभाव, उदार। पञ्चम के क्रूर: नहीं। योग: केमद्रुमयोगः, शुभकर्तरीयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः। यह प्रवृत्ति है, बच्चे का चित्र या लिंग नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेशफल २४ · कारकत्व ३२ · सन्तान-स्वभाव पञ्चमेश और गुरु से — प्रवृत्ति, पहचान नहीं

फल
पञ्चमेश बृहस्पति से स्वभाव-संकेत: धार्मिक, गुरु-स्वभाव, उदार। पञ्चम के क्रूर: नहीं। योग: केमद्रुमयोगः, शुभकर्तरीयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः। यह प्रवृत्ति है, बच्चे का चित्र या लिंग नहीं।
स्वभाव
धार्मिक, गुरु-स्वभाव, उदार
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेशफल २४ · कारकत्व ३२
विधि
सन्तान-स्वभाव पञ्चमेश और गुरु से — प्रवृत्ति, पहचान नहीं

कुटुम्ब

द्वितीय भाव निर्बल (SAV 5) कुटुम्ब और वाणी। धनेश बुध भाव 12 में, अरि। कुटुम्ब में ग्रह: शुक्र। यह घर का बन्ध है, वंश-घटना नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · धन/कुटुम्बभाव (प्रचलित recension में ~अ. १३) · द्वितीय कुटुम्ब और वाणी — घर का बन्ध, घटना नहीं

फल
द्वितीय भाव निर्बल (SAV 5) कुटुम्ब और वाणी। धनेश बुध भाव 12 में, अरि। कुटुम्ब में ग्रह: शुक्र। यह घर का बन्ध है, वंश-घटना नहीं।
धनेश
बुध · भाव 12
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
धन/कुटुम्बभाव (प्रचलित recension में ~अ. १३)
विधि
द्वितीय कुटुम्ब और वाणी — घर का बन्ध, घटना नहीं

गृह / माता

चतुर्थ भाव बलवान (SAV 5) गृह और माता। बन्धुेश मंगल भाव 11 में, अरि। चन्द्र भाव 4 (षड्बल दुर्बल) मनःसुख। यह घर का वातावरण है, सम्पत्ति-सौदा नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · बन्धुभाव (प्रचलित recension में ~अ. १५) · चतुर्थ गृह और माता — सुख, सम्पत्ति- सौदा नहीं

फल
चतुर्थ भाव बलवान (SAV 5) गृह और माता। बन्धुेश मंगल भाव 11 में, अरि। चन्द्र भाव 4 (षड्बल दुर्बल) मनःसुख। यह घर का वातावरण है, सम्पत्ति-सौदा नहीं।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
बन्धुभाव (प्रचलित recension में ~अ. १५)
विधि
चतुर्थ गृह और माता — सुख, सम्पत्ति- सौदा नहीं

वर्तमान दशा

वर्तमान बुध–बुध सन्तान/कुटुम्ब-भावों 2 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · गुरु/चन्द्र दशा · पञ्चमेश, गुरु या चन्द्र की अवधि सन्तान/घर जगाती है — जन्म-तिथि नहीं

फल
वर्तमान बुध–बुध सन्तान/कुटुम्ब-भावों 2 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेश-दशा · गुरु/चन्द्र दशा
विधि
पञ्चमेश, गुरु या चन्द्र की अवधि सन्तान/घर जगाती है — जन्म-तिथि नहीं

सन्तान-समय

सन्तान-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) · केतु–बृहस्पति (2036-06-22–2037-05-29) — सहारा, जन्म-तिथि नहीं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · गुरु/चन्द्र दशा · पञ्चमेश, गुरु या चन्द्र की अवधि सन्तान/घर जगाती है — जन्म-तिथि नहीं

फल
सन्तान-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) · केतु–बृहस्पति (2036-06-22–2037-05-29) — सहारा, जन्म-तिथि नहीं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेश-दशा · गुरु/चन्द्र दशा
विधि
पञ्चमेश, गुरु या चन्द्र की अवधि सन्तान/घर जगाती है — जन्म-तिथि नहीं

सन्तान योग

केमद्रुमयोगः शुभकर्तरीयोगः सरलयोगः नीचभङ्गराजयोगः

पञ्चमेश बृहस्पति षड्बल पर्याप्त। गुरु पर्याप्त · चन्द्र दुर्बल

सन्तान-समय (५ / २ / ४)

दशाअवधिबलभाव
बुध–बुध2026-08-22 – 2027-06-21दुर्बल2
बुध–केतु2027-06-21 – 2027-10-24तनाव2
बुध–शुक्र2027-10-24 – 2028-10-16दुर्बल2
बुध–सूर्य2028-10-16 – 2029-01-31बलवान2
बुध–चन्द्र2029-01-31 – 2029-07-29दुर्बल4, 2
बुध–मंगल2029-07-29 – 2029-12-01तनाव4, 2, 5
बुध–राहु2029-12-01 – 2030-10-18तनाव2
बुध–बृहस्पति2030-10-18 – 2031-07-31तनाव5, 4, 2
बुध–शनि2031-07-31 – 2032-07-04दुर्बल2, 5
केतु–शुक्र2032-11-30 – 2034-01-31दुर्बल2
केतु–चन्द्र2034-06-07 – 2035-01-06दुर्बल4
केतु–मंगल2035-01-06 – 2035-06-05बलवान4, 2, 5
केतु–बृहस्पति2036-06-22 – 2037-05-29बलवान5, 4

शास्त्रीय संदर्भ — बृहत्पाराशर होराशास्त्र

BPHS Putra-bhāva (5th) is children, intellect, and mantra-fruit. Read the bhāva, its lord, occupants, and Jupiter as santāna-kāraka. This is capacity — not a child-count or a gender.
BPHS Putra-bhāva (often printed as ch. 16; English paraphrase)
Dhana / Kutumba (2nd) is the family store, speech, and household bond. A supported 2nd eases family life; dusthāna or nīca strains it.
BPHS Dhana-bhāva (often printed as ch. 13; English paraphrase)
Bandhu (4th) is home, mother, and sukha. The 4th lord and the Moon show the house in which children grow — comfort, not a property deal.
BPHS Bandhu-bhāva (often printed as ch. 15; English paraphrase)
Bhāveśaphala: the 5th lord’s dignity and house show where santāna ripens. Ucca / own / kendra or trikoṇa supports; nīca or dusthāna strains it. Delay is not a prohibition.
BPHS Bhāveśaphala 24 (method; English paraphrase)
Sthira kārakas: Jupiter is children and dharma; the Moon is mother and mind. Both are judged with the 5th and 4th lords, not instead of them.
BPHS Kārakatwa 32 (English paraphrase of the usual sthira list)
Phaladeepika putra / yoga chapters treat Hamsa and Gaja-kesari as santāna-support when Jupiter is strong — a cross-check, not a second verse-database and not a birth-count.
Phaladeepika putra / yoga (English paraphrase of the method)

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