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NameDevadutt
LocationDehradun
Date2026-08-22
Time06:15 IST

API

Dasha Phala · Sūrya-siddhānta

GET /v1/vedic/dasha-phala?date=2026-08-22&time=06:15&place=Dehradun&engine=surya

Sūrya-siddhānta (nirayana)

Premium sample
North Indian
05 06 07 08 09 10 11 12 01 02 03 04 Su Mo Ma Me Ju Ve Sa Ra Ke Sorry, your browser does not support inline SVG.

दशा–अन्तर्दशा फल

वर्तमानबुध–बुधमहा / अन्तर
क्षितिज10 वर्ष2026-08-26 → 2036-08-26
अवधियाँ16महा × अन्तर
स्रोतबृहत्पाराशरअन्तर्दशा-फल · फलदीपिका बल

बुध–बुध · दुर्बल

बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–बुध · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2026-08-22 – 2027-06-21
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
मैत्री
स्व अन्तर्दशा
सक्रिय भाव
धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
अनुकूल
चुनौती
धन, व्यय, अरि

बुध–केतु · तनाव

केतु अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वैराग्य, विच्छेद, आध्यात्म क्षेत्र जगाती है। केतु भाव 1 में, सम। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। सक्रिय भाव तनु (1), जाया (7), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में विच्छेद, एकाकीपन, दिशा-भ्रम। भार: व्यय, अरि।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–केतु · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2027-06-21 – 2027-10-24
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
मैत्री
सक्रिय भाव
तनु (1), जाया (7), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
अनुकूल
चुनौती
व्यय, अरि

बुध–शुक्र · दुर्बल

शुक्र अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में कलत्र, सुख, वाहन, कला क्षेत्र जगाती है। शुक्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। शुक्र सहज (3), कर्म (10) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। महा–अन्तर मैत्री (अति मित्र) फल को सहारा देती है। इस अवधि में कलत्र-कलह, भोग-व्यय, कला में रुकावट। भार: रन्ध्र, व्यय, अरि, नीच दशा-स्वामी।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–शुक्र · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2027-10-24 – 2028-10-16
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
शुक्र · भाव 2 · नीच · स्वामी 3,10
मैत्री
अति मित्र
सक्रिय भाव
सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
अनुकूल
चुनौती
रन्ध्र, व्यय, अरि, नीच दशा-स्वामी

बुध–सूर्य · बलवान

सूर्य अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में आत्म, पिता, राजसम्मान क्षेत्र जगाती है। सूर्य मूलत्रिकोण है — फलदीपिका के अनुसार अन्तर्दशा बलवान। सूर्य तनु (1) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव तनु (1), जाया (7), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। महा–अन्तर मैत्री (अति मित्र) फल को सहारा देती है। इस अवधि में सम्मान और पितृ-सुख में सहयोग। सहयोग: तनु, जाया, लाभ।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–सूर्य · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2028-10-16 – 2029-01-31
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
सूर्य · भाव 1 · मूलत्रिकोण · स्वामी 1
मैत्री
अति मित्र
सक्रिय भाव
तनु (1), जाया (7), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
अनुकूल
तनु, जाया, लाभ
चुनौती
व्यय, अरि

बुध–चन्द्र · दुर्बल

चन्द्र अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में मन, माता, यात्रा, लोक क्षेत्र जगाती है। चन्द्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। चन्द्र व्यय (12) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव व्यय (12), बन्धु (4), कर्म (10), धन (2), लाभ (11), अरि (6)। महा–अन्तर शत्रुता (अति शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में चञ्चल मन, मातृ-चिन्ता। भार: व्यय, अरि, नीच दशा-स्वामी, महा–अन्तर शत्रुता।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–चन्द्र · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2029-01-31 – 2029-07-29
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
चन्द्र · भाव 4 · नीच · स्वामी 12
मैत्री
अति शत्रु
सक्रिय भाव
व्यय (12), बन्धु (4), कर्म (10), धन (2), लाभ (11), अरि (6)
अनुकूल
चुनौती
व्यय, अरि, नीच दशा-स्वामी, महा–अन्तर शत्रुता

बुध–मंगल · तनाव

मंगल अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में साहस, भूमि, सहोदर क्षेत्र जगाती है। मंगल अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। मंगल बन्धु (4), धर्म (9) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव बन्धु (4), धर्म (9), लाभ (11), धन (2), पुत्र (5), अरि (6), व्यय (12)। महा–अन्तर मैत्री (मित्र) फल को सहारा देती है। इस अवधि में कलह, रक्त-पित्त, सहोदर-विवाद। भार: अरि, व्यय। योगकारक स्वामित्व कर्म/भाग्य को सहारा दे सकता है।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–मंगल · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2029-07-29 – 2029-12-01
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
मंगल · भाव 11 · अरि · स्वामी 4,9
मैत्री
मित्र
सक्रिय भाव
बन्धु (4), धर्म (9), लाभ (11), धन (2), पुत्र (5), अरि (6), व्यय (12)
अनुकूल
कर्म, भाग्य
चुनौती
अरि, व्यय

बुध–राहु · तनाव

राहु अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में विदेश, अकस्मात्, अपूर्व मार्ग क्षेत्र जगाती है। राहु भाव 7 में, सम। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। सक्रिय भाव जाया (7), तनु (1), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में भ्रम, अचानक विघ्न, अस्थिरता। भार: व्यय, अरि।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–राहु · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2029-12-01 – 2030-10-18
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
राहु · भाव 7 · सम · स्वामी —
मैत्री
सक्रिय भाव
जाया (7), तनु (1), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
अनुकूल
चुनौती
व्यय, अरि

बुध–बृहस्पति · तनाव

बृहस्पति अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में धर्म, सन्तान, गुरु, धन क्षेत्र जगाती है। बृहस्पति उच्च है — फलदीपिका के अनुसार अन्तर्दशा बलवान। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। बृहस्पति पुत्र (5), रन्ध्र (8) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव पुत्र (5), रन्ध्र (8), व्यय (12), बन्धु (4), अरि (6), धन (2), लाभ (11)। महा–अन्तर शत्रुता (शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में गुरु-विरोध, सन्तान-चिन्ता, धर्म में शिथिलता। भार: रन्ध्र, व्यय, अरि, महा–अन्तर शत्रुता।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–बृहस्पति · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2030-10-18 – 2031-07-31
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
बृहस्पति · भाव 12 · उच्च · स्वामी 5,8
मैत्री
शत्रु
सक्रिय भाव
पुत्र (5), रन्ध्र (8), व्यय (12), बन्धु (4), अरि (6), धन (2), लाभ (11)
अनुकूल
चुनौती
रन्ध्र, व्यय, अरि, महा–अन्तर शत्रुता

बुध–शनि · दुर्बल

शनि अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में श्रम, सेवा, आयु, विलम्ब क्षेत्र जगाती है। शनि भाव 8 में, सम। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। शनि अरि (6), जाया (7) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5), लाभ (11), व्यय (12)। महा–अन्तर शत्रुता (शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में विलम्ब, श्रम-भार, शोक। भार: अरि, जाया, रन्ध्र, धन, व्यय, महा–अन्तर शत्रुता।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · बुध–शनि · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2031-07-31 – 2032-07-04
महादशा
बुध · भाव 12 · अरि · स्वामी 2,11
अन्तर्दशा
शनि · भाव 8 · सम · स्वामी 6,7
मैत्री
शत्रु
सक्रिय भाव
अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5), लाभ (11), व्यय (12)
अनुकूल
चुनौती
अरि, जाया, रन्ध्र, धन, व्यय, महा–अन्तर शत्रुता

केतु–केतु · बलवान

केतु अन्तर्दशा केतु महादशा (मोक्ष/विच्छेद-क्षेत्र) में वैराग्य, विच्छेद, आध्यात्म क्षेत्र जगाती है। केतु भाव 1 में, सम। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। सक्रिय भाव तनु (1), जाया (7)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वैराग्य, तीर्थ, सूक्ष्म ज्ञान। सहयोग: तनु, जाया।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · केतु–केतु · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2032-07-04 – 2032-11-30
महादशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
अन्तर्दशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
मैत्री
स्व अन्तर्दशा
सक्रिय भाव
तनु (1), जाया (7)
अनुकूल
तनु, जाया
चुनौती

केतु–शुक्र · दुर्बल

शुक्र अन्तर्दशा केतु महादशा (मोक्ष/विच्छेद-क्षेत्र) में कलत्र, सुख, वाहन, कला क्षेत्र जगाती है। शुक्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। शुक्र सहज (3), कर्म (10) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8), तनु (1), जाया (7)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में कलत्र-कलह, भोग-व्यय, कला में रुकावट। भार: रन्ध्र, नीच दशा-स्वामी।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · केतु–शुक्र · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2032-11-30 – 2034-01-31
महादशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
अन्तर्दशा
शुक्र · भाव 2 · नीच · स्वामी 3,10
मैत्री
सक्रिय भाव
सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8), तनु (1), जाया (7)
अनुकूल
चुनौती
रन्ध्र, नीच दशा-स्वामी

केतु–सूर्य · बलवान

सूर्य अन्तर्दशा केतु महादशा (मोक्ष/विच्छेद-क्षेत्र) में आत्म, पिता, राजसम्मान क्षेत्र जगाती है। सूर्य मूलत्रिकोण है — फलदीपिका के अनुसार अन्तर्दशा बलवान। सूर्य तनु (1) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव तनु (1), जाया (7)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में सम्मान और पितृ-सुख में सहयोग। सहयोग: तनु, जाया।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · केतु–सूर्य · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2034-01-31 – 2034-06-07
महादशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
अन्तर्दशा
सूर्य · भाव 1 · मूलत्रिकोण · स्वामी 1
मैत्री
सक्रिय भाव
तनु (1), जाया (7)
अनुकूल
तनु, जाया
चुनौती

केतु–चन्द्र · दुर्बल

चन्द्र अन्तर्दशा केतु महादशा (मोक्ष/विच्छेद-क्षेत्र) में मन, माता, यात्रा, लोक क्षेत्र जगाती है। चन्द्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। चन्द्र व्यय (12) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव व्यय (12), बन्धु (4), कर्म (10), तनु (1), जाया (7)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में चञ्चल मन, मातृ-चिन्ता। भार: व्यय, नीच दशा-स्वामी।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · केतु–चन्द्र · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2034-06-07 – 2035-01-06
महादशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
अन्तर्दशा
चन्द्र · भाव 4 · नीच · स्वामी 12
मैत्री
सक्रिय भाव
व्यय (12), बन्धु (4), कर्म (10), तनु (1), जाया (7)
अनुकूल
चुनौती
व्यय, नीच दशा-स्वामी

केतु–मंगल · बलवान

मंगल अन्तर्दशा केतु महादशा (मोक्ष/विच्छेद-क्षेत्र) में साहस, भूमि, सहोदर क्षेत्र जगाती है। मंगल अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। मंगल बन्धु (4), धर्म (9) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव बन्धु (4), धर्म (9), लाभ (11), धन (2), पुत्र (5), अरि (6), तनु (1), जाया (7)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में भूमि, पराक्रम, सहोदर-सुख। सहयोग: बन्धु, धर्म, लाभ, पुत्र, तनु, जाया, कर्म, भाग्य। योगकारक स्वामित्व कर्म/भाग्य को सहारा दे सकता है।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · केतु–मंगल · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2035-01-06 – 2035-06-05
महादशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
अन्तर्दशा
मंगल · भाव 11 · अरि · स्वामी 4,9
मैत्री
सक्रिय भाव
बन्धु (4), धर्म (9), लाभ (11), धन (2), पुत्र (5), अरि (6), तनु (1), जाया (7)
अनुकूल
बन्धु, धर्म, लाभ, पुत्र, तनु, जाया, कर्म, भाग्य
चुनौती
अरि

केतु–राहु · बलवान

राहु अन्तर्दशा केतु महादशा (मोक्ष/विच्छेद-क्षेत्र) में विदेश, अकस्मात्, अपूर्व मार्ग क्षेत्र जगाती है। राहु भाव 7 में, सम। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। सक्रिय भाव जाया (7), तनु (1)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में विदेश/अपूर्व लाभ, नया मार्ग। सहयोग: जाया, तनु।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · केतु–राहु · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2035-06-05 – 2036-06-22
महादशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
अन्तर्दशा
राहु · भाव 7 · सम · स्वामी —
मैत्री
सक्रिय भाव
जाया (7), तनु (1)
अनुकूल
जाया, तनु
चुनौती

केतु–बृहस्पति · बलवान

बृहस्पति अन्तर्दशा केतु महादशा (मोक्ष/विच्छेद-क्षेत्र) में धर्म, सन्तान, गुरु, धन क्षेत्र जगाती है। बृहस्पति उच्च है — फलदीपिका के अनुसार अन्तर्दशा बलवान। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। बृहस्पति पुत्र (5), रन्ध्र (8) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव पुत्र (5), रन्ध्र (8), व्यय (12), बन्धु (4), अरि (6), तनु (1), जाया (7)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में गुरु-कृपा, सन्तान, धर्माय धन। सहयोग: पुत्र, बन्धु, तनु, जाया।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अन्तर्दशा-फल · केतु–बृहस्पति · फलदीपिका (बल/राशि)

अवधि
2036-06-22 – 2037-05-29
महादशा
केतु · भाव 1 · सम · स्वामी —
अन्तर्दशा
बृहस्पति · भाव 12 · उच्च · स्वामी 5,8
मैत्री
सक्रिय भाव
पुत्र (5), रन्ध्र (8), व्यय (12), बन्धु (4), अरि (6), तनु (1), जाया (7)
अनुकूल
पुत्र, बन्धु, तनु, जाया
चुनौती
रन्ध्र, व्यय, अरि

शास्त्र — बृहत्पाराशर होराशास्त्र

BPHS first teaches Vimśottarī calculation, then general daśā-phala, then a chapter of antardaśā results inside each mahādaśā (Sun through Venus). Those antar chapters judge the sub-lord by dignity and placement — uccha, own sign, kendra or trikoṇa versus nīca, enemy sign, or dusthāna — not by a single stock sentence for the pair.
BPHS Vimśottarī / daśā-phala / antardaśā-phala adhyāyas (English paraphrase of the method; chapter numbers vary by edition)
The daśā of a bhāva-lord activates that bhāva. Results also arise from the house the period lord occupies and the houses it aspects.
BPHS daśā of bhāva-lords (often printed near ch. 48; English paraphrase)
Sthira kārakas colour the same period: Sun—self/father; Moon—mind/mother; Mars—siblings/courage; Mercury—speech; Jupiter—children/dharma; Venus—spouse; Saturn—longevity/labour.
BPHS Kārakatwa 32 (English paraphrase of the usual sthira list)
Phaladeepika: a graha in exaltation, own sign, or a friend’s sign gives a supportive daśā; in debilitation or an enemy’s sign the daśā is strained. This is a dignity check on the BPHS antar method, not a second verse-database.
Phaladeepika daśā-phala (English paraphrase of the dignity rule)
Functional lordship for the Lagna (yogakāraka, trikoṇa, dusthāna, māraka) turns the same natural graha śubha or pāpa for that chart.
BPHS yogakāraka / functional lordship (Santhanam ch. 34 class; English paraphrase)

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