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Sūrya-siddhānta (nirayana)
Premium sampleस्वास्थ्य / देह रिपोर्ट
देह-प्रकृति
लग्न सिंह (स्थिर — दृढ़ / दीर्घ प्रवृत्ति)। तत्त्व अग्नि — ऊष्ण / तेज। लग्नेश सूर्य भाव 1 में, मूलत्रिकोण (षड्बल पर्याप्त)। स्वभाव-संकेत: तेजस्वी, ऊष्ण, नेतृत्व-देह। तनु SAV क्रम 10। यह देह-प्रकृति है, चिकित्सकीय निदान नहीं।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · तनुभाव (प्रचलित recension में ~अ. १२) · लग्न + लग्नेश + सूर्य — प्रकृति, निदान नहीं
- फल
- लग्न सिंह (स्थिर — दृढ़ / दीर्घ प्रवृत्ति)। तत्त्व अग्नि — ऊष्ण / तेज। लग्नेश सूर्य भाव 1 में, मूलत्रिकोण (षड्बल पर्याप्त)। स्वभाव-संकेत: तेजस्वी, ऊष्ण, नेतृत्व-देह। तनु SAV क्रम 10। यह देह-प्रकृति है, चिकित्सकीय निदान नहीं।
- लग्नेश
- सूर्य · भाव 1 · मूलत्रिकोण · SAV 23
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- तनुभाव (प्रचलित recension में ~अ. १२)
- विधि
- लग्न + लग्नेश + सूर्य — प्रकृति, निदान नहीं
तेज और कारक
सूर्य भाव 1 (षड्बल पर्याप्त) तेज; चन्द्र भाव 4 (षड्बल दुर्बल) द्रव/मन; मंगल भाव 11 (षड्बल सीमांत) रक्त/ऊष्मा; शनि भाव 8 (षड्बल प्रबल) दीर्घ भार। लग्न में ग्रह: सूर्य, केतु। कारक सहारा है, रोग-नाम नहीं।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कारकत्व ३२ · भावेशफल २४ · सूर्य तेज, चन्द्र द्रव/मन, मंगल रक्त, शनि दीर्घ भार
- फल
- सूर्य भाव 1 (षड्बल पर्याप्त) तेज; चन्द्र भाव 4 (षड्बल दुर्बल) द्रव/मन; मंगल भाव 11 (षड्बल सीमांत) रक्त/ऊष्मा; शनि भाव 8 (षड्बल प्रबल) दीर्घ भार। लग्न में ग्रह: सूर्य, केतु। कारक सहारा है, रोग-नाम नहीं।
- तत्त्व
- अग्नि — ऊष्ण / तेज
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- कारकत्व ३२ · भावेशफल २४
- विधि
- सूर्य तेज, चन्द्र द्रव/मन, मंगल रक्त, शनि दीर्घ भार
संवेदनशील क्षेत्र
षष्ठ भाव मिश्र (अंक 63), SAV क्रम 3। षष्ठेश शनि भाव 8 में। षष्ठ में ग्रह: रिक्त। संवेदनशील संकेत: शिर और समग्र देह, नाभि, आन्त्र-पक्ष, गुह्य / दीर्घ-छिपा पक्ष। यह क्षेत्र-ध्वज है, बीमारी का नाम नहीं।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अरि/रोगभाव (प्रचलित recension में ~अ. १७) · षष्ठ + षष्ठेश संवेदनशील क्षेत्र — रोग-नाम नहीं
- फल
- षष्ठ भाव मिश्र (अंक 63), SAV क्रम 3। षष्ठेश शनि भाव 8 में। षष्ठ में ग्रह: रिक्त। संवेदनशील संकेत: शिर और समग्र देह, नाभि, आन्त्र-पक्ष, गुह्य / दीर्घ-छिपा पक्ष। यह क्षेत्र-ध्वज है, बीमारी का नाम नहीं।
- षष्ठेश
- शनि · भाव 8
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- अरि/रोगभाव (प्रचलित recension में ~अ. १७)
- विधि
- षष्ठ + षष्ठेश संवेदनशील क्षेत्र — रोग-नाम नहीं
दीर्घ / छिपा तनाव
रन्ध्र बलवान (SAV 8); रन्ध्रेश बृहस्पति भाव 12 में। लग्न के क्रूर: सूर्य, केतु; षष्ठ के क्रूर: नहीं; रन्ध्र के क्रूर: शनि। योग: केमद्रुमयोगः, उभयाचारीयोगः, हर्षयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः (हर्ष/सरल/विमल दुःस्थान-भंग जाँच)। आयु-काल आयुर्दाय में — यहाँ काल-तिथि नहीं।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · रन्ध्रभाव ~अ. १९ · फलदीपिका रोग/दुःस्थान · आठवाँ दीर्घ/छिपा तनाव; आयु-काल आयुर्दाय में
- फल
- रन्ध्र बलवान (SAV 8); रन्ध्रेश बृहस्पति भाव 12 में। लग्न के क्रूर: सूर्य, केतु; षष्ठ के क्रूर: नहीं; रन्ध्र के क्रूर: शनि। योग: केमद्रुमयोगः, उभयाचारीयोगः, हर्षयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः (हर्ष/सरल/विमल दुःस्थान-भंग जाँच)। आयु-काल आयुर्दाय में — यहाँ काल-तिथि नहीं।
- आयुर्दाय
- आयुर्दाय
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- रन्ध्रभाव ~अ. १९ · फलदीपिका रोग/दुःस्थान
- विधि
- आठवाँ दीर्घ/छिपा तनाव; आयु-काल आयुर्दाय में
वर्तमान दशा
वर्तमान बुध–बुध तनु/अरि/रन्ध्र 6 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · तनु/अरि/रन्ध्र · लग्नेश, षष्ठेश या रन्ध्रेश की अवधि देह जगाती है — रोग-तिथि नहीं
- फल
- वर्तमान बुध–बुध तनु/अरि/रन्ध्र 6 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- भावेश-दशा · तनु/अरि/रन्ध्र
- विधि
- लग्नेश, षष्ठेश या रन्ध्रेश की अवधि देह जगाती है — रोग-तिथि नहीं
देह-समय
देह-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–केतु (2032-07-04–2032-11-30) · केतु–सूर्य (2034-01-31–2034-06-07) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) — सहारा, रोग-तिथि नहीं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · तनु/अरि/रन्ध्र · लग्नेश, षष्ठेश या रन्ध्रेश की अवधि देह जगाती है — रोग-तिथि नहीं
- फल
- देह-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–केतु (2032-07-04–2032-11-30) · केतु–सूर्य (2034-01-31–2034-06-07) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) — सहारा, रोग-तिथि नहीं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- भावेश-दशा · तनु/अरि/रन्ध्र
- विधि
- लग्नेश, षष्ठेश या रन्ध्रेश की अवधि देह जगाती है — रोग-तिथि नहीं
देह योग
केमद्रुमयोगः उभयाचारीयोगः हर्षयोगः सरलयोगः नीचभङ्गराजयोगः
लग्नेश सूर्य षड्बल पर्याप्त। सूर्य पर्याप्त · चन्द्र दुर्बल · मंगल सीमांत · शनि प्रबल
देह-समय (१ / ६ / ८)
| दशा | अवधि | बल | भाव |
|---|---|---|---|
| बुध–बुध | 2026-08-22 – 2027-06-21 | दुर्बल | 6 |
| बुध–केतु | 2027-06-21 – 2027-10-24 | तनाव | 1, 6 |
| बुध–शुक्र | 2027-10-24 – 2028-10-16 | दुर्बल | 8, 6 |
| बुध–सूर्य | 2028-10-16 – 2029-01-31 | बलवान | 1, 6 |
| बुध–चन्द्र | 2029-01-31 – 2029-07-29 | दुर्बल | 6 |
| बुध–मंगल | 2029-07-29 – 2029-12-01 | तनाव | 6 |
| बुध–राहु | 2029-12-01 – 2030-10-18 | तनाव | 1, 6 |
| बुध–बृहस्पति | 2030-10-18 – 2031-07-31 | तनाव | 8, 6 |
| बुध–शनि | 2031-07-31 – 2032-07-04 | दुर्बल | 6, 8 |
| केतु–केतु | 2032-07-04 – 2032-11-30 | बलवान | 1 |
| केतु–शुक्र | 2032-11-30 – 2034-01-31 | दुर्बल | 8, 1 |
| केतु–सूर्य | 2034-01-31 – 2034-06-07 | बलवान | 1 |
| केतु–चन्द्र | 2034-06-07 – 2035-01-06 | दुर्बल | 1 |
| केतु–मंगल | 2035-01-06 – 2035-06-05 | बलवान | 6, 1 |
| केतु–राहु | 2035-06-05 – 2036-06-22 | बलवान | 1 |
| केतु–बृहस्पति | 2036-06-22 – 2037-05-29 | बलवान | 8, 6, 1 |
शास्त्रीय संदर्भ — बृहत्पाराशर होराशास्त्र
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