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Prefill · cannot be changedEnterprise subscription वाले स्थान और वर्ष बदल सकते हैं कुण्डली PDF
NameDevadutt
LocationDehradun
Date2026-08-22
Time06:15 IST

API

Health · Sūrya-siddhānta

GET /v1/vedic/health-report?date=2026-08-22&time=06:15&place=Dehradun&engine=surya

Sūrya-siddhānta (nirayana)

Premium sample
North Indian
05 06 07 08 09 10 11 12 01 02 03 04 Su Mo Ma Me Ju Ve Sa Ra Ke Sorry, your browser does not support inline SVG.

स्वास्थ्य / देह रिपोर्ट

लग्नसिंहमिश्र
लग्नेशसूर्यभाव 1 · मूलत्रिकोण
षष्ठेशशनिअरि / रोग
दशाबुध–बुधमहा / अन्तर

देह-प्रकृति

लग्न सिंह (स्थिर — दृढ़ / दीर्घ प्रवृत्ति)। तत्त्व अग्नि — ऊष्ण / तेज। लग्नेश सूर्य भाव 1 में, मूलत्रिकोण (षड्बल पर्याप्त)। स्वभाव-संकेत: तेजस्वी, ऊष्ण, नेतृत्व-देह। तनु SAV क्रम 10। यह देह-प्रकृति है, चिकित्सकीय निदान नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · तनुभाव (प्रचलित recension में ~अ. १२) · लग्न + लग्नेश + सूर्य — प्रकृति, निदान नहीं

फल
लग्न सिंह (स्थिर — दृढ़ / दीर्घ प्रवृत्ति)। तत्त्व अग्नि — ऊष्ण / तेज। लग्नेश सूर्य भाव 1 में, मूलत्रिकोण (षड्बल पर्याप्त)। स्वभाव-संकेत: तेजस्वी, ऊष्ण, नेतृत्व-देह। तनु SAV क्रम 10। यह देह-प्रकृति है, चिकित्सकीय निदान नहीं।
लग्नेश
सूर्य · भाव 1 · मूलत्रिकोण · SAV 23
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
तनुभाव (प्रचलित recension में ~अ. १२)
विधि
लग्न + लग्नेश + सूर्य — प्रकृति, निदान नहीं

तेज और कारक

सूर्य भाव 1 (षड्बल पर्याप्त) तेज; चन्द्र भाव 4 (षड्बल दुर्बल) द्रव/मन; मंगल भाव 11 (षड्बल सीमांत) रक्त/ऊष्मा; शनि भाव 8 (षड्बल प्रबल) दीर्घ भार। लग्न में ग्रह: सूर्य, केतु। कारक सहारा है, रोग-नाम नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · कारकत्व ३२ · भावेशफल २४ · सूर्य तेज, चन्द्र द्रव/मन, मंगल रक्त, शनि दीर्घ भार

फल
सूर्य भाव 1 (षड्बल पर्याप्त) तेज; चन्द्र भाव 4 (षड्बल दुर्बल) द्रव/मन; मंगल भाव 11 (षड्बल सीमांत) रक्त/ऊष्मा; शनि भाव 8 (षड्बल प्रबल) दीर्घ भार। लग्न में ग्रह: सूर्य, केतु। कारक सहारा है, रोग-नाम नहीं।
तत्त्व
अग्नि — ऊष्ण / तेज
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
कारकत्व ३२ · भावेशफल २४
विधि
सूर्य तेज, चन्द्र द्रव/मन, मंगल रक्त, शनि दीर्घ भार

संवेदनशील क्षेत्र

षष्ठ भाव मिश्र (अंक 63), SAV क्रम 3। षष्ठेश शनि भाव 8 में। षष्ठ में ग्रह: रिक्त। संवेदनशील संकेत: शिर और समग्र देह, नाभि, आन्त्र-पक्ष, गुह्य / दीर्घ-छिपा पक्ष। यह क्षेत्र-ध्वज है, बीमारी का नाम नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अरि/रोगभाव (प्रचलित recension में ~अ. १७) · षष्ठ + षष्ठेश संवेदनशील क्षेत्र — रोग-नाम नहीं

फल
षष्ठ भाव मिश्र (अंक 63), SAV क्रम 3। षष्ठेश शनि भाव 8 में। षष्ठ में ग्रह: रिक्त। संवेदनशील संकेत: शिर और समग्र देह, नाभि, आन्त्र-पक्ष, गुह्य / दीर्घ-छिपा पक्ष। यह क्षेत्र-ध्वज है, बीमारी का नाम नहीं।
षष्ठेश
शनि · भाव 8
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
अरि/रोगभाव (प्रचलित recension में ~अ. १७)
विधि
षष्ठ + षष्ठेश संवेदनशील क्षेत्र — रोग-नाम नहीं

दीर्घ / छिपा तनाव

रन्ध्र बलवान (SAV 8); रन्ध्रेश बृहस्पति भाव 12 में। लग्न के क्रूर: सूर्य, केतु; षष्ठ के क्रूर: नहीं; रन्ध्र के क्रूर: शनि। योग: केमद्रुमयोगः, उभयाचारीयोगः, हर्षयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः (हर्ष/सरल/विमल दुःस्थान-भंग जाँच)। आयु-काल आयुर्दाय में — यहाँ काल-तिथि नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · रन्ध्रभाव ~अ. १९ · फलदीपिका रोग/दुःस्थान · आठवाँ दीर्घ/छिपा तनाव; आयु-काल आयुर्दाय में

फल
रन्ध्र बलवान (SAV 8); रन्ध्रेश बृहस्पति भाव 12 में। लग्न के क्रूर: सूर्य, केतु; षष्ठ के क्रूर: नहीं; रन्ध्र के क्रूर: शनि। योग: केमद्रुमयोगः, उभयाचारीयोगः, हर्षयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः (हर्ष/सरल/विमल दुःस्थान-भंग जाँच)। आयु-काल आयुर्दाय में — यहाँ काल-तिथि नहीं।
आयुर्दाय
आयुर्दाय
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
रन्ध्रभाव ~अ. १९ · फलदीपिका रोग/दुःस्थान
विधि
आठवाँ दीर्घ/छिपा तनाव; आयु-काल आयुर्दाय में

वर्तमान दशा

वर्तमान बुध–बुध तनु/अरि/रन्ध्र 6 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · तनु/अरि/रन्ध्र · लग्नेश, षष्ठेश या रन्ध्रेश की अवधि देह जगाती है — रोग-तिथि नहीं

फल
वर्तमान बुध–बुध तनु/अरि/रन्ध्र 6 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेश-दशा · तनु/अरि/रन्ध्र
विधि
लग्नेश, षष्ठेश या रन्ध्रेश की अवधि देह जगाती है — रोग-तिथि नहीं

देह-समय

देह-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–केतु (2032-07-04–2032-11-30) · केतु–सूर्य (2034-01-31–2034-06-07) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) — सहारा, रोग-तिथि नहीं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · तनु/अरि/रन्ध्र · लग्नेश, षष्ठेश या रन्ध्रेश की अवधि देह जगाती है — रोग-तिथि नहीं

फल
देह-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–केतु (2032-07-04–2032-11-30) · केतु–सूर्य (2034-01-31–2034-06-07) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) — सहारा, रोग-तिथि नहीं। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेश-दशा · तनु/अरि/रन्ध्र
विधि
लग्नेश, षष्ठेश या रन्ध्रेश की अवधि देह जगाती है — रोग-तिथि नहीं

देह योग

केमद्रुमयोगः उभयाचारीयोगः हर्षयोगः सरलयोगः नीचभङ्गराजयोगः

लग्नेश सूर्य षड्बल पर्याप्त। सूर्य पर्याप्त · चन्द्र दुर्बल · मंगल सीमांत · शनि प्रबल

देह-समय (१ / ६ / ८)

दशाअवधिबलभाव
बुध–बुध2026-08-22 – 2027-06-21दुर्बल6
बुध–केतु2027-06-21 – 2027-10-24तनाव1, 6
बुध–शुक्र2027-10-24 – 2028-10-16दुर्बल8, 6
बुध–सूर्य2028-10-16 – 2029-01-31बलवान1, 6
बुध–चन्द्र2029-01-31 – 2029-07-29दुर्बल6
बुध–मंगल2029-07-29 – 2029-12-01तनाव6
बुध–राहु2029-12-01 – 2030-10-18तनाव1, 6
बुध–बृहस्पति2030-10-18 – 2031-07-31तनाव8, 6
बुध–शनि2031-07-31 – 2032-07-04दुर्बल6, 8
केतु–केतु2032-07-04 – 2032-11-30बलवान1
केतु–शुक्र2032-11-30 – 2034-01-31दुर्बल8, 1
केतु–सूर्य2034-01-31 – 2034-06-07बलवान1
केतु–चन्द्र2034-06-07 – 2035-01-06दुर्बल1
केतु–मंगल2035-01-06 – 2035-06-05बलवान6, 1
केतु–राहु2035-06-05 – 2036-06-22बलवान1
केतु–बृहस्पति2036-06-22 – 2037-05-29बलवान8, 6, 1

शास्त्रीय संदर्भ — बृहत्पाराशर होराशास्त्र

BPHS Tanu-bhāva (1st) is the body, vitality, and appearance. Read the bhāva, its lord, occupants, and the Sun as deha-kāraka. This is constitution and support — not a medical diagnosis.
BPHS Tanu-bhāva (often printed as ch. 12; English paraphrase)
Ari / Roga-bhāva (6th) is disease, debt, and opponents. The 6th lord and occupants mark sensitive zones. A strong 6th as upachaya can also show fighting capacity — not a named illness.
BPHS Ari-bhāva (often printed as ch. 17; English paraphrase)
Randhra (8th) is the hidden, chronic, and longevity-strain layer. It is not a death date. Span selection stays in Āyurdāya.
BPHS Randhra-bhāva (often printed as ch. 19; English paraphrase)
Bhāveśaphala: the Lagna lord’s dignity and house show where the body ripens. Ucca / own / kendra supports vitality; nīca or dusthāna strains it.
BPHS Bhāveśaphala 24 (method; English paraphrase)
Sthira kārakas: Sun — vitality; Moon — fluids and mind; Mars — blood and heat; Saturn — joints, delay, and chronic load.
BPHS Kārakatwa 32 (English paraphrase of the usual sthira list)
Phaladeepika roga chapters treat dusthāna lords and malefic occupation as strain yogas. Harsha / Sarala / Vimala are cancellation checks, not extra invented slokas.
Phaladeepika roga / dusthāna yoga (English paraphrase of the method)

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