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Lahiri
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
एक ही अष्टमी–रोहिणी घड़ी, दो निर्णय। स्मार्त (धर्मसिन्धु): जिस निशीथ में अष्टमी व्याप्त हो — सूर्योदय सप्तमी भी चल सकता है। वैष्णव (हरिभक्तिविलास): सप्तमी-विद्ध दिन पर व्रत नहीं; उदय अष्टमी या नवमी, जयन्ती योग श्रेष्ठ। पारण अष्टमी (वैष्णव: रोहिणी भी) समाप्त होने के बाद, रात्रि में नहीं।
कृष्ण अष्टमी
| Field | Value |
|---|---|
| गणित | दृक् · लाहिरी |
| विक्रम संवत् | 2083 |
| संवत्सर | रौद्री |
| कृष्ण अष्टमी आरंभ | 2026-09-04 · 02:26 IST |
| कृष्ण अष्टमी समाप्ति | 2026-09-05 · 00:14 IST |
| पूर्णिमान्त | Bhadrapada |
| अमान्त | Shravana |
| अधिक | नहीं |
रात्रि-तुलना
हर कार्ड तीन बातें: सूर्योदय पर कौन सी तिथि, निशीथ की घड़ी, और क्या वही अष्टमी निशीथ में थी।
- आरंभ
- 4 सितम्बर 02:26 IST
- समाप्ति
- 5 सितम्बर 00:14 IST
- सूर्योदय पर
- कृष्ण सप्तमी
- निशीथ
- 23:54 IST – 00:39 IST
- निशीथ में अष्टमी
- नहीं · अष्टमी निशीथ के बाद शुरू
अष्टमी 2026-09-04 · 02:26 IST पर शुरू। यह निशीथ पहले खत्म।
- सूर्योदय पर
- कृष्ण अष्टमी
- निशीथ
- 23:54 IST – 00:39 IST
- निशीथ में अष्टमी
- हाँ · अष्टमी 23:54 IST – 00:14 IST
निशीथ में कृष्ण अष्टमी व्याप्त — यही जन्म-काल।
- सूर्योदय पर
- कृष्ण नवमी
- निशीथ
- 23:53 IST – 00:39 IST
- निशीथ में अष्टमी
- नहीं · अष्टमी निशीथ से पहले समाप्त
अष्टमी 2026-09-05 · 00:14 IST पर खत्म। निशीथ 23:53 IST से।
| रात्रि | सूर्योदय पर | निशीथ | अष्टमी निशीथ में | भूमिका |
|---|---|---|---|---|
| 3 सितम्बर | कृष्ण सप्तमी | 23:54 IST – 00:39 IST | नहीं | अभ्यर्थी रात्रि |
| 4 सितम्बर | कृष्ण अष्टमी | 23:54 IST – 00:39 IST | हाँ | स्मार्त · वैष्णव व्रत |
| 5 सितम्बर | कृष्ण नवमी | 23:53 IST – 00:39 IST | नहीं | अभ्यर्थी रात्रि |
| Field | Value |
|---|---|
| जयन्ती योग | हाँ · अष्टमी+रोहिणी |
| रोहिणी आरंभ | 2026-09-04 · 00:29 IST |
| रोहिणी समाप्ति | 2026-09-04 · 23:04 IST |
| स्मार्त पारण | 2026-09-05 · 05:56 IST |
| वैष्णव पारण | 2026-09-05 · 05:56 IST |
| स्मार्त सूत्र | निशीथव्यापिनी अष्टमी |
| वैष्णव सूत्र | शुद्धा अष्टमी उदयतिथिः |
आधार
भाद्रपदकृष्णाष्टमी निशीथव्यापिनी श्रीकृष्णजन्माष्टमी।
Janmāṣṭamī is Bhādrapada Kṛṣṇa Aṣṭamī when that tithi pervades niśītha — the midnight of the birth — not when Aṣṭamī merely prevails at sunrise.
धर्मसिन्धुः
अष्टमी रोहिणीयुक्ता जयन्तीत्यभिधीयते।
Aṣṭamī joined with Rohiṇī is called Jayantī. Smartas use this yoga to break a two-night niśītha tie; Vaiṣṇavas treat it as the preferred shuddha day.
धर्मसिन्धुः / निर्णयसिन्धुः
स्मार्ताः निशीथव्यापिनीम् अष्टमीं गृह्णन्ति सप्तम्योदयेऽपि।
Smartas take the Aṣṭamī that pervades niśītha even when sunrise is still Saptamī. The civil label may be Saptamī or Aṣṭamī.
धर्मसिन्धुः / निर्णयसिन्धुः
वैष्णवाः सप्तमीविद्धां अष्टमीं न कुर्वन्ति।
Vaiṣṇavas never begin the vrat on a Saptamī-udaya day. Their date is Aṣṭamī or Navāmī at sunrise, and is the later day whenever the two sampradāyas split.
हरिभक्तिविलास
पारणं अष्टमीसमाप्तौ वैष्णवैः रोहिण्याश्च परेद्युरुदयात्।
Break the fast after Aṣṭamī ends, and after Rohiṇī as well for Vaiṣṇavas — never before the next sunrise.
धर्मसिन्धुः
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