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Sūrya-siddhānta (nirayana)
Premium sampleविवाह / संबंध रिपोर्ट
विवाह की सम्भावना
सप्तम भाव निर्बल (अंक 27), SAV क्रम 12। सप्तमेश शनि भाव 8 में, सम। शुक्र भाव 2 (षड्बल पर्याप्त), गुरु भाव 12 (षड्बल पर्याप्त)। पुत्र/प्रेम पञ्चम मिश्र। यह विवाह-समर्थन है, निश्चित वर्ष नहीं।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · युवति/कलत्रभाव (प्रचलित recension में ~अ. १८) · सप्तम + सप्तमेश + कारक — सम्भावना, विवाह-तिथि नहीं
- फल
- सप्तम भाव निर्बल (अंक 27), SAV क्रम 12। सप्तमेश शनि भाव 8 में, सम। शुक्र भाव 2 (षड्बल पर्याप्त), गुरु भाव 12 (षड्बल पर्याप्त)। पुत्र/प्रेम पञ्चम मिश्र। यह विवाह-समर्थन है, निश्चित वर्ष नहीं।
- सप्तमेश
- शनि · भाव 8 · सम · SAV 21
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- युवति/कलत्रभाव (प्रचलित recension में ~अ. १८)
- विधि
- सप्तम + सप्तमेश + कारक — सम्भावना, विवाह-तिथि नहीं
जीवनसाथी की प्रकृति
सप्तमेश शनि से स्वभाव-संकेत: गम्भीर, विलम्ब, स्थिर। सप्तम में ग्रह: राहु। शुक्र कलत्र-कारक, गुरु पति-कारक (स्त्री-कुण्डली में विशेष)। यह प्रवृत्ति है, व्यक्ति का चित्र नहीं।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेशफल २४ · कारकत्व ३२ · जीवनसाथी का स्वभाव सप्तमेश और शुक्र/गुरु से — प्रवृत्ति, पहचान नहीं
- फल
- सप्तमेश शनि से स्वभाव-संकेत: गम्भीर, विलम्ब, स्थिर। सप्तम में ग्रह: राहु। शुक्र कलत्र-कारक, गुरु पति-कारक (स्त्री-कुण्डली में विशेष)। यह प्रवृत्ति है, व्यक्ति का चित्र नहीं।
- स्वभाव
- गम्भीर, विलम्ब, स्थिर
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- भावेशफल २४ · कारकत्व ३२
- विधि
- जीवनसाथी का स्वभाव सप्तमेश और शुक्र/गुरु से — प्रवृत्ति, पहचान नहीं
वैवाहिक सामंजस्य
सामंजस्य सप्तम-बल, शुक्र/गुरु और लग्नेश–सप्तमेश मैत्री से। नवांश लग्न कर्क, D9 सप्तम मकर (स्वामी शनि)। लग्नेश–सप्तमेश मैत्री अति शत्रु। योग: केमद्रुमयोगः, शुभकर्तरीयोगः, हर्षयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः। शुभकर्तरी सहारा, पापकर्तरी दबाव — दोनों को D1 से पढ़ा गया।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेशफल २४ · पञ्चधा मैत्री · नवांश · लग्नेश–सप्तमेश मैत्री और D9 सप्तम सामंजस्य की दूसरी परत
- फल
- सामंजस्य सप्तम-बल, शुक्र/गुरु और लग्नेश–सप्तमेश मैत्री से। नवांश लग्न कर्क, D9 सप्तम मकर (स्वामी शनि)। लग्नेश–सप्तमेश मैत्री अति शत्रु। योग: केमद्रुमयोगः, शुभकर्तरीयोगः, हर्षयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः। शुभकर्तरी सहारा, पापकर्तरी दबाव — दोनों को D1 से पढ़ा गया।
- नवांश
- D9 लग्न कर्क · सप्तम मकर
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- भावेशफल २४ · पञ्चधा मैत्री · नवांश
- विधि
- लग्नेश–सप्तमेश मैत्री और D9 सप्तम सामंजस्य की दूसरी परत
संबंध चुनौती
मंगल १/४/७/८/१२ में नहीं — इस परत पर कुज-ध्वज नहीं। सप्तम के क्रूर: राहु। रन्ध्र बलवान (SAV 8) छिपे तनाव, व्यय निर्बल विच्छेद/व्यय पक्ष। पाप ग्रह दबाव बढ़ाते हैं, विवाह का निषेध नहीं लिखते।
फलदीपिका · फलदीपिका १० मांगलिक · BPHS रन्ध्र/व्यय · कुज १/४/७/८/१२ ध्वज; पूर्ण भंग /v1/vedic/dosha/manglik
- फल
- मंगल १/४/७/८/१२ में नहीं — इस परत पर कुज-ध्वज नहीं। सप्तम के क्रूर: राहु। रन्ध्र बलवान (SAV 8) छिपे तनाव, व्यय निर्बल विच्छेद/व्यय पक्ष। पाप ग्रह दबाव बढ़ाते हैं, विवाह का निषेध नहीं लिखते।
- ग्रन्थ
- फलदीपिका
- अध्याय
- फलदीपिका १० मांगलिक · BPHS रन्ध्र/व्यय
- विधि
- कुज १/४/७/८/१२ ध्वज; पूर्ण भंग /v1/vedic/dosha/manglik
वर्तमान दशा
वर्तमान बुध–बुध कलत्र-भावों 2, 12 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · शुक्र/गुरु दशा · सप्तमेश, शुक्र या गुरु की अवधि कलत्र जगाती है — तिथि नहीं
- फल
- वर्तमान बुध–बुध कलत्र-भावों 2, 12 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- भावेश-दशा · शुक्र/गुरु दशा
- विधि
- सप्तमेश, शुक्र या गुरु की अवधि कलत्र जगाती है — तिथि नहीं
विवाह-समय
कलत्र-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–केतु (2032-07-04–2032-11-30) · केतु–सूर्य (2034-01-31–2034-06-07) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) — तिथि नहीं, दशा-सहारा। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · शुक्र/गुरु दशा · सप्तमेश, शुक्र या गुरु की अवधि कलत्र जगाती है — तिथि नहीं
- फल
- कलत्र-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–केतु (2032-07-04–2032-11-30) · केतु–सूर्य (2034-01-31–2034-06-07) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) — तिथि नहीं, दशा-सहारा। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
- ग्रन्थ
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- अध्याय
- भावेश-दशा · शुक्र/गुरु दशा
- विधि
- सप्तमेश, शुक्र या गुरु की अवधि कलत्र जगाती है — तिथि नहीं
कलत्र योग
केमद्रुमयोगः शुभकर्तरीयोगः हर्षयोगः सरलयोगः नीचभङ्गराजयोगः
सप्तमेश शनि षड्बल प्रबल। शुक्र पर्याप्त · गुरु पर्याप्त
कलत्र-समय (७ / ५ / २ / ८ / १२)
| दशा | अवधि | बल | भाव |
|---|---|---|---|
| बुध–बुध | 2026-08-22 – 2027-06-21 | दुर्बल | 2, 12 |
| बुध–केतु | 2027-06-21 – 2027-10-24 | तनाव | 7, 2, 12 |
| बुध–शुक्र | 2027-10-24 – 2028-10-16 | दुर्बल | 2, 8, 12 |
| बुध–सूर्य | 2028-10-16 – 2029-01-31 | बलवान | 7, 2, 12 |
| बुध–चन्द्र | 2029-01-31 – 2029-07-29 | दुर्बल | 12, 2 |
| बुध–मंगल | 2029-07-29 – 2029-12-01 | तनाव | 2, 5, 12 |
| बुध–राहु | 2029-12-01 – 2030-10-18 | तनाव | 7, 2, 12 |
| बुध–बृहस्पति | 2030-10-18 – 2031-07-31 | तनाव | 5, 8, 12, 2 |
| बुध–शनि | 2031-07-31 – 2032-07-04 | दुर्बल | 7, 8, 2, 5, 12 |
| केतु–केतु | 2032-07-04 – 2032-11-30 | बलवान | 7 |
| केतु–शुक्र | 2032-11-30 – 2034-01-31 | दुर्बल | 2, 8, 7 |
| केतु–सूर्य | 2034-01-31 – 2034-06-07 | बलवान | 7 |
| केतु–चन्द्र | 2034-06-07 – 2035-01-06 | दुर्बल | 12, 7 |
| केतु–मंगल | 2035-01-06 – 2035-06-05 | बलवान | 2, 5, 7 |
| केतु–राहु | 2035-06-05 – 2036-06-22 | बलवान | 7 |
| केतु–बृहस्पति | 2036-06-22 – 2037-05-29 | बलवान | 5, 8, 12, 7 |
शास्त्रीय संदर्भ — बृहत्पाराशर होराशास्त्र
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