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Engine

Sample identity

Prefill · cannot be changedEnterprise subscription वाले स्थान और वर्ष बदल सकते हैं कुण्डली PDF
NameDevadutt
LocationDehradun
Date2026-08-22
Time06:15 IST

API

Marriage · Sūrya-siddhānta

GET /v1/vedic/marriage-report?date=2026-08-22&time=06:15&place=Dehradun&engine=surya

Sūrya-siddhānta (nirayana)

Premium sample
North Indian
05 06 07 08 09 10 11 12 01 02 03 04 Su Mo Ma Me Ju Ve Sa Ra Ke Sorry, your browser does not support inline SVG.

विवाह / संबंध रिपोर्ट

लग्नसिंहतनाव
सप्तमेशशनिभाव 8 · सम
नवांशकर्कD9 सप्तम मकर
दशाबुध–बुधमहा / अन्तर

विवाह की सम्भावना

सप्तम भाव निर्बल (अंक 27), SAV क्रम 12। सप्तमेश शनि भाव 8 में, सम। शुक्र भाव 2 (षड्बल पर्याप्त), गुरु भाव 12 (षड्बल पर्याप्त)। पुत्र/प्रेम पञ्चम मिश्र। यह विवाह-समर्थन है, निश्चित वर्ष नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · युवति/कलत्रभाव (प्रचलित recension में ~अ. १८) · सप्तम + सप्तमेश + कारक — सम्भावना, विवाह-तिथि नहीं

फल
सप्तम भाव निर्बल (अंक 27), SAV क्रम 12। सप्तमेश शनि भाव 8 में, सम। शुक्र भाव 2 (षड्बल पर्याप्त), गुरु भाव 12 (षड्बल पर्याप्त)। पुत्र/प्रेम पञ्चम मिश्र। यह विवाह-समर्थन है, निश्चित वर्ष नहीं।
सप्तमेश
शनि · भाव 8 · सम · SAV 21
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
युवति/कलत्रभाव (प्रचलित recension में ~अ. १८)
विधि
सप्तम + सप्तमेश + कारक — सम्भावना, विवाह-तिथि नहीं

जीवनसाथी की प्रकृति

सप्तमेश शनि से स्वभाव-संकेत: गम्भीर, विलम्ब, स्थिर। सप्तम में ग्रह: राहु। शुक्र कलत्र-कारक, गुरु पति-कारक (स्त्री-कुण्डली में विशेष)। यह प्रवृत्ति है, व्यक्ति का चित्र नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेशफल २४ · कारकत्व ३२ · जीवनसाथी का स्वभाव सप्तमेश और शुक्र/गुरु से — प्रवृत्ति, पहचान नहीं

फल
सप्तमेश शनि से स्वभाव-संकेत: गम्भीर, विलम्ब, स्थिर। सप्तम में ग्रह: राहु। शुक्र कलत्र-कारक, गुरु पति-कारक (स्त्री-कुण्डली में विशेष)। यह प्रवृत्ति है, व्यक्ति का चित्र नहीं।
स्वभाव
गम्भीर, विलम्ब, स्थिर
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेशफल २४ · कारकत्व ३२
विधि
जीवनसाथी का स्वभाव सप्तमेश और शुक्र/गुरु से — प्रवृत्ति, पहचान नहीं

वैवाहिक सामंजस्य

सामंजस्य सप्तम-बल, शुक्र/गुरु और लग्नेश–सप्तमेश मैत्री से। नवांश लग्न कर्क, D9 सप्तम मकर (स्वामी शनि)। लग्नेश–सप्तमेश मैत्री अति शत्रु। योग: केमद्रुमयोगः, शुभकर्तरीयोगः, हर्षयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः। शुभकर्तरी सहारा, पापकर्तरी दबाव — दोनों को D1 से पढ़ा गया।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेशफल २४ · पञ्चधा मैत्री · नवांश · लग्नेश–सप्तमेश मैत्री और D9 सप्तम सामंजस्य की दूसरी परत

फल
सामंजस्य सप्तम-बल, शुक्र/गुरु और लग्नेश–सप्तमेश मैत्री से। नवांश लग्न कर्क, D9 सप्तम मकर (स्वामी शनि)। लग्नेश–सप्तमेश मैत्री अति शत्रु। योग: केमद्रुमयोगः, शुभकर्तरीयोगः, हर्षयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः। शुभकर्तरी सहारा, पापकर्तरी दबाव — दोनों को D1 से पढ़ा गया।
नवांश
D9 लग्न कर्क · सप्तम मकर
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेशफल २४ · पञ्चधा मैत्री · नवांश
विधि
लग्नेश–सप्तमेश मैत्री और D9 सप्तम सामंजस्य की दूसरी परत

संबंध चुनौती

मंगल १/४/७/८/१२ में नहीं — इस परत पर कुज-ध्वज नहीं। सप्तम के क्रूर: राहु। रन्ध्र बलवान (SAV 8) छिपे तनाव, व्यय निर्बल विच्छेद/व्यय पक्ष। पाप ग्रह दबाव बढ़ाते हैं, विवाह का निषेध नहीं लिखते।

फलदीपिका · फलदीपिका १० मांगलिक · BPHS रन्ध्र/व्यय · कुज १/४/७/८/१२ ध्वज; पूर्ण भंग /v1/vedic/dosha/manglik

फल
मंगल १/४/७/८/१२ में नहीं — इस परत पर कुज-ध्वज नहीं। सप्तम के क्रूर: राहु। रन्ध्र बलवान (SAV 8) छिपे तनाव, व्यय निर्बल विच्छेद/व्यय पक्ष। पाप ग्रह दबाव बढ़ाते हैं, विवाह का निषेध नहीं लिखते।
ग्रन्थ
फलदीपिका
अध्याय
फलदीपिका १० मांगलिक · BPHS रन्ध्र/व्यय
विधि
कुज १/४/७/८/१२ ध्वज; पूर्ण भंग /v1/vedic/dosha/manglik

वर्तमान दशा

वर्तमान बुध–बुध कलत्र-भावों 2, 12 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · शुक्र/गुरु दशा · सप्तमेश, शुक्र या गुरु की अवधि कलत्र जगाती है — तिथि नहीं

फल
वर्तमान बुध–बुध कलत्र-भावों 2, 12 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेश-दशा · शुक्र/गुरु दशा
विधि
सप्तमेश, शुक्र या गुरु की अवधि कलत्र जगाती है — तिथि नहीं

विवाह-समय

कलत्र-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–केतु (2032-07-04–2032-11-30) · केतु–सूर्य (2034-01-31–2034-06-07) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) — तिथि नहीं, दशा-सहारा। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा · शुक्र/गुरु दशा · सप्तमेश, शुक्र या गुरु की अवधि कलत्र जगाती है — तिथि नहीं

फल
कलत्र-समर्थ खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-10-16–2029-01-31) · केतु–केतु (2032-07-04–2032-11-30) · केतु–सूर्य (2034-01-31–2034-06-07) · केतु–मंगल (2035-01-06–2035-06-05) — तिथि नहीं, दशा-सहारा। सावधानी: बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेश-दशा · शुक्र/गुरु दशा
विधि
सप्तमेश, शुक्र या गुरु की अवधि कलत्र जगाती है — तिथि नहीं

कलत्र योग

केमद्रुमयोगः शुभकर्तरीयोगः हर्षयोगः सरलयोगः नीचभङ्गराजयोगः

सप्तमेश शनि षड्बल प्रबल। शुक्र पर्याप्त · गुरु पर्याप्त

कलत्र-समय (७ / ५ / २ / ८ / १२)

दशाअवधिबलभाव
बुध–बुध2026-08-22 – 2027-06-21दुर्बल2, 12
बुध–केतु2027-06-21 – 2027-10-24तनाव7, 2, 12
बुध–शुक्र2027-10-24 – 2028-10-16दुर्बल2, 8, 12
बुध–सूर्य2028-10-16 – 2029-01-31बलवान7, 2, 12
बुध–चन्द्र2029-01-31 – 2029-07-29दुर्बल12, 2
बुध–मंगल2029-07-29 – 2029-12-01तनाव2, 5, 12
बुध–राहु2029-12-01 – 2030-10-18तनाव7, 2, 12
बुध–बृहस्पति2030-10-18 – 2031-07-31तनाव5, 8, 12, 2
बुध–शनि2031-07-31 – 2032-07-04दुर्बल7, 8, 2, 5, 12
केतु–केतु2032-07-04 – 2032-11-30बलवान7
केतु–शुक्र2032-11-30 – 2034-01-31दुर्बल2, 8, 7
केतु–सूर्य2034-01-31 – 2034-06-07बलवान7
केतु–चन्द्र2034-06-07 – 2035-01-06दुर्बल12, 7
केतु–मंगल2035-01-06 – 2035-06-05बलवान2, 5, 7
केतु–राहु2035-06-05 – 2036-06-22बलवान7
केतु–बृहस्पति2036-06-22 – 2037-05-29बलवान5, 8, 12, 7

शास्त्रीय संदर्भ — बृहत्पाराशर होराशास्त्र

BPHS Yuvati / Kalatra-bhāva (7th) is spouse and partnership. Read the bhāva, its lord, occupants, and the kāraka — not a stock sentence about ‘early marriage’.
BPHS Yuvati-bhāva (often printed as ch. 18; English paraphrase)
Sthira kārakas: Venus is the usual kalatra-kāraka; Jupiter is read as the husband-kāraka in a female chart. Both are judged with the 7th lord, not instead of him.
BPHS Kārakatwa 32 (English paraphrase of the usual sthira list)
Bhāveśaphala: the 7th lord’s dignity and the house he occupies show where partnership ripens. Ucca / own / kendra supports harmony; nīca or dusthāna strains it.
BPHS Bhāveśaphala 24 (method; English paraphrase)
Navāṃśa (D9) confirms the 7th: the D9 Lagna and its 7th sign are a second reading of spouse, not a cancellation of D1.
BPHS varga / navāṃśa method (English paraphrase)
Phaladeepika 10 treats Kuja in 1/4/7/8/12 as a marriage-strain yoga, with printed bhaṅga. This report only flags the house; the full Kuja module is /v1/vedic/dosha/manglik.
Phaladeepika 10 Māṅgalika (cross-check; do not invent extra slokas)
The daśā of the 7th lord, Venus, or Jupiter can activate marriage-themes. Timing is a window of support, not a wedding date.
BPHS daśā of bhāva-lords (English paraphrase)

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