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Prefill · cannot be changedEnterprise subscription वाले स्थान और वर्ष बदल सकते हैं कुण्डली PDF
NameDevadutt
LocationDehradun
Date2026-08-22
Time06:15 IST

API

Wealth · Drik

GET /v1/vedic/wealth-report?date=2026-08-22&time=06:15&place=Dehradun

Lahiri

Premium sample
North Indian
05 06 07 08 09 10 11 12 01 02 03 04 Su Mo Ma Me Ju Ve Sa Ra Ke Sorry, your browser does not support inline SVG.

धन / वित्त रिपोर्ट

लग्नसिंहतनाव
धनेशबुधभाव 12 · अरि
लाभेशबुधएकादश
दशाबुध–बुधमहा / अन्तर

धनार्जन क्षमता

धनभाव निर्बल (अंक 20), SAV क्रम 5। धनेश बुध भाव 12 में, अरि। लाभभाव निर्बल (SAV क्रम 2), लाभेश बुध। कारक गुरु भाव 12 में, षड्बल पर्याप्त। यह धनार्जन-क्षमता है, निश्चित राशि नहीं।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · धनभाव (प्रचलित recension में ~अ. १३) · भाव + भावेश + बृहस्पति कारक — क्षमता, घटना नहीं

फल
धनभाव निर्बल (अंक 20), SAV क्रम 5। धनेश बुध भाव 12 में, अरि। लाभभाव निर्बल (SAV क्रम 2), लाभेश बुध। कारक गुरु भाव 12 में, षड्बल पर्याप्त। यह धनार्जन-क्षमता है, निश्चित राशि नहीं।
धनेश
बुध · भाव 12 · अरि · SAV 29
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
धनभाव (प्रचलित recension में ~अ. १३)
विधि
भाव + भावेश + बृहस्पति कारक — क्षमता, घटना नहीं

आय के स्रोत

शास्त्र में आय का मार्ग धनेश, लाभेश और उन भावों के ग्रहों से देखा जाता है। इस कुण्डली के संकेत: व्यापार, लेखन, गणना · भूमि, धातु, साहस-कर्म · गुरु-कार्य, परामर्श, धर्माय लाभ · कला, वाहन, सुख-वस्तु। द्वितीय में शुक्र, एकादश में मंगल। भाग्येश मंगल नवम को जोड़ता है।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · लाभभाव (~अ. २२) + भावेशफल २४ · एकादश आगमन, द्वितीय संग्रह; भावेश की राशि/भाव से स्रोत

फल
शास्त्र में आय का मार्ग धनेश, लाभेश और उन भावों के ग्रहों से देखा जाता है। इस कुण्डली के संकेत: व्यापार, लेखन, गणना · भूमि, धातु, साहस-कर्म · गुरु-कार्य, परामर्श, धर्माय लाभ · कला, वाहन, सुख-वस्तु। द्वितीय में शुक्र, एकादश में मंगल। भाग्येश मंगल नवम को जोड़ता है।
मार्ग
व्यापार, लेखन, गणना · भूमि, धातु, साहस-कर्म · गुरु-कार्य, परामर्श, धर्माय लाभ · कला, वाहन, सुख-वस्तु
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
लाभभाव (~अ. २२) + भावेशफल २४
विधि
एकादश आगमन, द्वितीय संग्रह; भावेश की राशि/भाव से स्रोत

बचत एवं संपत्ति

संग्रह द्वितीय, संपत्ति/गृह चतुर्थ (बलवान, SAV क्रम 5), भाग्य नवम (मिश्र, SAV क्रम 3)। योग: शुभकर्तरीयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः। धन-योग बलवान ग्रह पर ही फल देते हैं — द्वितीय जाँच बचत तब पुष्ट जब धनेश बलवान और द्वादश कम व्यय करे।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · धन १३ · बन्धु/सुख १५ · धर्म २० · बचत द्वितीय, संपत्ति चतुर्थ, भाग्य नवम

फल
संग्रह द्वितीय, संपत्ति/गृह चतुर्थ (बलवान, SAV क्रम 5), भाग्य नवम (मिश्र, SAV क्रम 3)। योग: शुभकर्तरीयोगः, सरलयोगः, नीचभङ्गराजयोगः। धन-योग बलवान ग्रह पर ही फल देते हैं — द्वितीय जाँच बचत तब पुष्ट जब धनेश बलवान और द्वादश कम व्यय करे।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
धन १३ · बन्धु/सुख १५ · धर्म २०
विधि
बचत द्वितीय, संपत्ति चतुर्थ, भाग्य नवम

वित्तीय चुनौती

रन्ध्र बलवान (SAV क्रम 8) छिपे/अकस्मात् धन-प्रवाह को दिखाता है। व्यय निर्बल (SAV क्रम 9) निर्गम है। धनेश यदि नीच या दुःस्थान में हो तो क्षमता घटती है, शून्य नहीं होती।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · रन्ध्र (~अ. १९) · व्यय (~अ. २३) · अष्टम छिपा/अकस्मात्, द्वादश व्यय — सावधानी, दिवाला नहीं

फल
रन्ध्र बलवान (SAV क्रम 8) छिपे/अकस्मात् धन-प्रवाह को दिखाता है। व्यय निर्बल (SAV क्रम 9) निर्गम है। धनेश यदि नीच या दुःस्थान में हो तो क्षमता घटती है, शून्य नहीं होती।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
रन्ध्र (~अ. १९) · व्यय (~अ. २३)
विधि
अष्टम छिपा/अकस्मात्, द्वादश व्यय — सावधानी, दिवाला नहीं

वर्तमान दशा

वर्तमान बुध–बुध धन-भावों 2, 11, 12 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा + विम्शोत्तरी अन्तर्दशा-फल · २/११/९ के स्वामी-अवधि धन जगाती है; ८/१२ व्यय/विघ्न

फल
वर्तमान बुध–बुध धन-भावों 2, 11, 12 को छूती है — दुर्बल। बुध अन्तर्दशा बुध महादशा (बुद्धि/वाणी-क्षेत्र) में वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि क्षेत्र जगाती है। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि, चिन्ता। भार: धन, व्यय, अरि।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेश-दशा + विम्शोत्तरी अन्तर्दशा-फल
विधि
२/११/९ के स्वामी-अवधि धन जगाती है; ८/१२ व्यय/विघ्न

अनुकूल / सावधानी समय

अनुकूल धन-खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-08-15–2028-11-21) · केतु–मंगल (2034-07-21–2034-12-17) · केतु–बृहस्पति (2036-01-05–2036-12-11)। सावधानी (व्यय/विघ्न): बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।

बृहत्पाराशर होराशास्त्र · भावेश-दशा + विम्शोत्तरी अन्तर्दशा-फल · २/११/९ के स्वामी-अवधि धन जगाती है; ८/१२ व्यय/विघ्न

फल
अनुकूल धन-खिड़कियाँ: बुध–सूर्य (2028-08-15–2028-11-21) · केतु–मंगल (2034-07-21–2034-12-17) · केतु–बृहस्पति (2036-01-05–2036-12-11)। सावधानी (व्यय/विघ्न): बुध–बुध · बुध–केतु · बुध–शुक्र।
ग्रन्थ
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
अध्याय
भावेश-दशा + विम्शोत्तरी अन्तर्दशा-फल
विधि
२/११/९ के स्वामी-अवधि धन जगाती है; ८/१२ व्यय/विघ्न

धन योग

शुभकर्तरीयोगः सरलयोगः नीचभङ्गराजयोगः

धनेश बुध षड्बल सीमांत। बृहस्पति पर्याप्त · शुक्र पर्याप्त · बुध सीमांत

धन-समय (२ / ११ / ९ / ८ / १२)

दशाअवधिबलभाव
बुध–बुध2026-08-22 – 2027-05-28दुर्बल2, 11, 12
बुध–केतु2027-05-28 – 2027-09-21तनाव2, 11, 12
बुध–शुक्र2027-09-21 – 2028-08-15दुर्बल2, 8, 11, 12
बुध–सूर्य2028-08-15 – 2028-11-21बलवान2, 11, 12
बुध–चन्द्र2028-11-21 – 2029-05-05दुर्बल12, 4, 2, 11
बुध–मंगल2029-05-05 – 2029-08-28तनाव4, 9, 11, 2, 12
बुध–राहु2029-08-28 – 2030-06-20तनाव2, 11, 12
बुध–बृहस्पति2030-06-20 – 2031-03-11तनाव8, 12, 4, 2, 11
बुध–शनि2031-03-11 – 2032-01-17दुर्बल8, 2, 11, 12
केतु–शुक्र2032-06-14 – 2033-08-14दुर्बल2, 8
केतु–चन्द्र2033-12-20 – 2034-07-21दुर्बल12, 4
केतु–मंगल2034-07-21 – 2034-12-17बलवान4, 9, 11, 2
केतु–बृहस्पति2036-01-05 – 2036-12-11बलवान8, 12, 4

शास्त्रीय संदर्भ — बृहत्पाराशर होराशास्त्र

BPHS Dhana-bhāva (2nd) is wealth, speech, and family store. Read the bhāva, its lord, occupants, and Jupiter as dhana-kāraka. A strong 2nd supports earning capacity; dusthāna or nīca strains it.
BPHS Dhana-bhāva (often printed as ch. 13; English paraphrase)
Labha-bhāva (11th) is gains and fulfilment of desires. The 11th lord and occupants show how gains arrive. Compared with the 2nd, the 11th is inflow; the 2nd is the store.
BPHS Labha-bhāva (often printed as ch. 22; English paraphrase)
Dharma / Bhāgya (9th) colours fortune behind wealth. A supported 9th lord helps the 2nd and 11th ripen; a weak 9th makes earning irregular even if the 2nd looks full.
BPHS Dharma-bhāva (often printed as ch. 20; English paraphrase)
Randhra (8th) hides or suddenly moves wealth (legacy, blockage). Vyaya (12th) is outgo and loss. Both are strain layers on dhana, not a prediction of bankruptcy.
BPHS Randhra / Vyaya (often ch. 19 and 23; English paraphrase)
Bhāveśaphala 24: the 2nd and 11th lords’ dignity and house show where money ripens. Kārakatwa 32: Jupiter is the sthira dhana-kāraka; Venus comforts; Mercury trade.
BPHS 24 Bhāveśaphala + 32 Kārakatwa (English paraphrase)
Phaladeepika yoga chapters treat Chandra-Maṅgala, Hamsa, and related combinations as wealth-support when the yoga grahas are strong — a cross-check, not a second verse-database.
Phaladeepika yoga / dhana (English paraphrase of the method)

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