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Sūrya-siddhānta (nirayana)
Premium sampleयोगिनी दशा फल
भद्रिका–भद्रिका · दुर्बल
भद्रिका अन्तर्दशा भद्रिका महादशा (मंगल वाणी, विद्या, व्यापार) में मंगल वाणी, विद्या, व्यापार जगाती है। स्वामी बुध — वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि। भार: धन, व्यय, अरि।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · भद्रिका–भद्रिका · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2026-08-22 – 2026-11-17
- महायोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- अन्तयोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- मैत्री
- स्व अन्तर्दशा
- सक्रिय भाव
- धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- धन, व्यय, अरि
भद्रिका–उल्का · दुर्बल
उल्का अन्तर्दशा भद्रिका महादशा (मंगल वाणी, विद्या, व्यापार) में अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब जगाती है। स्वामी शनि — श्रम, सेवा, आयु, विलम्ब। शनि भाव 8 में, सम। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। शनि अरि (6), जाया (7) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5), लाभ (11), व्यय (12)। महा–अन्तर शत्रुता (शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में अकस्मात् विघ्न, श्रम-भार, विलम्ब। भार: अरि, जाया, रन्ध्र, धन, व्यय, महा–अन्तर शत्रुता।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · भद्रिका–उल्का · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2026-11-17 – 2027-03-02
- महायोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- अन्तयोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- मैत्री
- शत्रु
- सक्रिय भाव
- अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5), लाभ (11), व्यय (12)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- अरि, जाया, रन्ध्र, धन, व्यय, महा–अन्तर शत्रुता
भद्रिका–सिद्धा · दुर्बल
सिद्धा अन्तर्दशा भद्रिका महादशा (मंगल वाणी, विद्या, व्यापार) में सिद्धि, कलत्र, सुख-भोग जगाती है। स्वामी शुक्र — कलत्र, सुख, वाहन, कला। शुक्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। शुक्र सहज (3), कर्म (10) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। महा–अन्तर मैत्री (अति मित्र) फल को सहारा देती है। इस अवधि में कलत्र-कलह, भोग-व्यय। भार: रन्ध्र, व्यय, अरि, नीच दशा-स्वामी।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · भद्रिका–सिद्धा · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2027-03-02 – 2027-07-03
- महायोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- अन्तयोगिनी
- सिद्धा · स्वामी शुक्र · भाव 2 · नीच
- मैत्री
- अति मित्र
- सक्रिय भाव
- सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- रन्ध्र, व्यय, अरि, नीच दशा-स्वामी
भद्रिका–संकटा · तनाव
संकटा अन्तर्दशा भद्रिका महादशा (मंगल वाणी, विद्या, व्यापार) में संकट, विघ्न, छाया-मार्ग जगाती है। स्वामी राहु — विदेश, अकस्मात्, अपूर्व मार्ग। राहु भाव 7 में, सम। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। सक्रिय भाव जाया (7), तनु (1), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में संकट, भ्रम, अचानक रुकावट। भार: व्यय, अरि।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · भद्रिका–संकटा · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2027-07-03 – 2027-11-20
- महायोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- अन्तयोगिनी
- संकटा · स्वामी राहु · भाव 7 · सम
- मैत्री
- —
- सक्रिय भाव
- जाया (7), तनु (1), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- व्यय, अरि
भद्रिका–मंगला · दुर्बल
मंगला अन्तर्दशा भद्रिका महादशा (मंगल वाणी, विद्या, व्यापार) में शुभ आरम्भ, मन, मातृ-सुख जगाती है। स्वामी चन्द्र — मन, माता, यात्रा, लोक। चन्द्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। चन्द्र व्यय (12) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव व्यय (12), बन्धु (4), कर्म (10), धन (2), लाभ (11), अरि (6)। महा–अन्तर शत्रुता (अति शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में चञ्चल मन, मातृ-चिन्ता। भार: व्यय, अरि, नीच दशा-स्वामी, महा–अन्तर शत्रुता।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · भद्रिका–मंगला · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2027-11-20 – 2027-12-08
- महायोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- अन्तयोगिनी
- मंगला · स्वामी चन्द्र · भाव 4 · नीच
- मैत्री
- अति शत्रु
- सक्रिय भाव
- व्यय (12), बन्धु (4), कर्म (10), धन (2), लाभ (11), अरि (6)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- व्यय, अरि, नीच दशा-स्वामी, महा–अन्तर शत्रुता
भद्रिका–पिंगला · बलवान
पिंगला अन्तर्दशा भद्रिका महादशा (मंगल वाणी, विद्या, व्यापार) में तेज, पिता, राजकार्य जगाती है। स्वामी सूर्य — आत्म, पिता, राजसम्मान। सूर्य मूलत्रिकोण है — फलदीपिका के अनुसार अन्तर्दशा बलवान। सूर्य तनु (1) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव तनु (1), जाया (7), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)। महा–अन्तर मैत्री (अति मित्र) फल को सहारा देती है। इस अवधि में सम्मान, पितृ-सुख, राजकार्य। सहयोग: तनु, जाया, लाभ।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · भद्रिका–पिंगला · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2027-12-08 – 2028-01-12
- महायोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- अन्तयोगिनी
- पिंगला · स्वामी सूर्य · भाव 1 · मूलत्रिकोण
- मैत्री
- अति मित्र
- सक्रिय भाव
- तनु (1), जाया (7), धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6)
- अनुकूल
- तनु, जाया, लाभ
- चुनौती
- व्यय, अरि
भद्रिका–धन्या · तनाव
धन्या अन्तर्दशा भद्रिका महादशा (मंगल वाणी, विद्या, व्यापार) में धन, धर्म, गुरु जगाती है। स्वामी बृहस्पति — धर्म, सन्तान, गुरु, धन। बृहस्पति उच्च है — फलदीपिका के अनुसार अन्तर्दशा बलवान। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। बृहस्पति पुत्र (5), रन्ध्र (8) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव पुत्र (5), रन्ध्र (8), व्यय (12), बन्धु (4), अरि (6), धन (2), लाभ (11)। महा–अन्तर शत्रुता (शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में धन-चिन्ता, गुरु-विरोध। भार: रन्ध्र, व्यय, अरि, महा–अन्तर शत्रुता।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · भद्रिका–धन्या · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2028-01-12 – 2028-03-04
- महायोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- अन्तयोगिनी
- धन्या · स्वामी बृहस्पति · भाव 12 · उच्च
- मैत्री
- शत्रु
- सक्रिय भाव
- पुत्र (5), रन्ध्र (8), व्यय (12), बन्धु (4), अरि (6), धन (2), लाभ (11)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- रन्ध्र, व्यय, अरि, महा–अन्तर शत्रुता
भद्रिका–भ्रामरी · तनाव
भ्रामरी अन्तर्दशा भद्रिका महादशा (मंगल वाणी, विद्या, व्यापार) में भ्रमण, भूमि, सहोदर जगाती है। स्वामी मंगल — साहस, भूमि, सहोदर। मंगल अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। मंगल बन्धु (4), धर्म (9) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव बन्धु (4), धर्म (9), लाभ (11), धन (2), पुत्र (5), अरि (6), व्यय (12)। महा–अन्तर मैत्री (मित्र) फल को सहारा देती है। इस अवधि में भ्रमण-कष्ट, कलह, सहोदर-विवाद। भार: अरि, व्यय।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · भद्रिका–भ्रामरी · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2028-03-04 – 2028-05-13
- महायोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- अन्तयोगिनी
- भ्रामरी · स्वामी मंगल · भाव 11 · अरि
- मैत्री
- मित्र
- सक्रिय भाव
- बन्धु (4), धर्म (9), लाभ (11), धन (2), पुत्र (5), अरि (6), व्यय (12)
- अनुकूल
- कर्म, भाग्य
- चुनौती
- अरि, व्यय
उल्का–उल्का · दुर्बल
उल्का अन्तर्दशा उल्का महादशा (अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब) में अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब जगाती है। स्वामी शनि — श्रम, सेवा, आयु, विलम्ब। शनि भाव 8 में, सम। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। शनि अरि (6), जाया (7) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में अकस्मात् विघ्न, श्रम-भार, विलम्ब। भार: अरि, जाया, रन्ध्र, धन।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · उल्का–उल्का · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2028-05-13 – 2029-05-13
- महायोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- अन्तयोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- मैत्री
- स्व अन्तर्दशा
- सक्रिय भाव
- अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- अरि, जाया, रन्ध्र, धन
उल्का–सिद्धा · दुर्बल
सिद्धा अन्तर्दशा उल्का महादशा (अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब) में सिद्धि, कलत्र, सुख-भोग जगाती है। स्वामी शुक्र — कलत्र, सुख, वाहन, कला। शुक्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। शुक्र सहज (3), कर्म (10) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8), अरि (6), जाया (7), पुत्र (5)। महा–अन्तर सम्बन्ध सम। इस अवधि में कलत्र-कलह, भोग-व्यय। भार: रन्ध्र, अरि, नीच दशा-स्वामी।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · उल्का–सिद्धा · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2029-05-13 – 2030-07-14
- महायोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- अन्तयोगिनी
- सिद्धा · स्वामी शुक्र · भाव 2 · नीच
- मैत्री
- सम
- सक्रिय भाव
- सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8), अरि (6), जाया (7), पुत्र (5)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- रन्ध्र, अरि, नीच दशा-स्वामी
उल्का–संकटा · मिश्र
संकटा अन्तर्दशा उल्का महादशा (अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब) में संकट, विघ्न, छाया-मार्ग जगाती है। स्वामी राहु — विदेश, अकस्मात्, अपूर्व मार्ग। राहु भाव 7 में, सम। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। सक्रिय भाव जाया (7), तनु (1), अरि (6), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। फल मिश्र — विदेश/अपूर्व मार्ग से निकलना भी, संकट, भ्रम, अचानक रुकावट भी।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · उल्का–संकटा · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2030-07-14 – 2031-11-13
- महायोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- अन्तयोगिनी
- संकटा · स्वामी राहु · भाव 7 · सम
- मैत्री
- —
- सक्रिय भाव
- जाया (7), तनु (1), अरि (6), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5)
- अनुकूल
- जाया, तनु, कर्म, पुत्र
- चुनौती
- अरि, रन्ध्र
उल्का–मंगला · दुर्बल
मंगला अन्तर्दशा उल्का महादशा (अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब) में शुभ आरम्भ, मन, मातृ-सुख जगाती है। स्वामी चन्द्र — मन, माता, यात्रा, लोक। चन्द्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। चन्द्र व्यय (12) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव व्यय (12), बन्धु (4), कर्म (10), अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), धन (2), पुत्र (5)। महा–अन्तर शत्रुता (अति शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में चञ्चल मन, मातृ-चिन्ता। भार: व्यय, अरि, रन्ध्र, नीच दशा-स्वामी, महा–अन्तर शत्रुता।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · उल्का–मंगला · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2031-11-13 – 2032-01-12
- महायोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- अन्तयोगिनी
- मंगला · स्वामी चन्द्र · भाव 4 · नीच
- मैत्री
- अति शत्रु
- सक्रिय भाव
- व्यय (12), बन्धु (4), कर्म (10), अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), धन (2), पुत्र (5)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- व्यय, अरि, रन्ध्र, नीच दशा-स्वामी, महा–अन्तर शत्रुता
उल्का–पिंगला · बलवान
पिंगला अन्तर्दशा उल्का महादशा (अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब) में तेज, पिता, राजकार्य जगाती है। स्वामी सूर्य — आत्म, पिता, राजसम्मान। सूर्य मूलत्रिकोण है — फलदीपिका के अनुसार अन्तर्दशा बलवान। सूर्य तनु (1) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव तनु (1), जाया (7), अरि (6), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5)। महा–अन्तर शत्रुता (अति शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में सम्मान, पितृ-सुख, राजकार्य। सहयोग: तनु, जाया, कर्म, पुत्र।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · उल्का–पिंगला · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2032-01-12 – 2032-05-13
- महायोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- अन्तयोगिनी
- पिंगला · स्वामी सूर्य · भाव 1 · मूलत्रिकोण
- मैत्री
- अति शत्रु
- सक्रिय भाव
- तनु (1), जाया (7), अरि (6), रन्ध्र (8), कर्म (10), धन (2), पुत्र (5)
- अनुकूल
- तनु, जाया, कर्म, पुत्र
- चुनौती
- अरि, रन्ध्र, महा–अन्तर शत्रुता
उल्का–धन्या · अनुकूल
धन्या अन्तर्दशा उल्का महादशा (अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब) में धन, धर्म, गुरु जगाती है। स्वामी बृहस्पति — धर्म, सन्तान, गुरु, धन। बृहस्पति उच्च है — फलदीपिका के अनुसार अन्तर्दशा बलवान। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। बृहस्पति पुत्र (5), रन्ध्र (8) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव पुत्र (5), रन्ध्र (8), व्यय (12), बन्धु (4), अरि (6), जाया (7), कर्म (10), धन (2)। महा–अन्तर शत्रुता (शत्रु) फल में संघर्ष लाती है। इस अवधि में धर्माय धन, गुरु-कृपा, सन्तान। सहयोग: पुत्र, बन्धु, जाया, कर्म।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · उल्का–धन्या · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2032-05-13 – 2032-11-12
- महायोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- अन्तयोगिनी
- धन्या · स्वामी बृहस्पति · भाव 12 · उच्च
- मैत्री
- शत्रु
- सक्रिय भाव
- पुत्र (5), रन्ध्र (8), व्यय (12), बन्धु (4), अरि (6), जाया (7), कर्म (10), धन (2)
- अनुकूल
- पुत्र, बन्धु, जाया, कर्म
- चुनौती
- रन्ध्र, व्यय, अरि, महा–अन्तर शत्रुता
उल्का–भ्रामरी · मिश्र
भ्रामरी अन्तर्दशा उल्का महादशा (अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब) में भ्रमण, भूमि, सहोदर जगाती है। स्वामी मंगल — साहस, भूमि, सहोदर। मंगल अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। मंगल बन्धु (4), धर्म (9) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव बन्धु (4), धर्म (9), लाभ (11), धन (2), पुत्र (5), अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10)। महा–अन्तर सम्बन्ध सम। फल मिश्र — भूमि, पराक्रम, सहोदर-सुख भी, भ्रमण-कष्ट, कलह, सहोदर-विवाद भी।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · उल्का–भ्रामरी · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2032-11-12 – 2033-07-13
- महायोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- अन्तयोगिनी
- भ्रामरी · स्वामी मंगल · भाव 11 · अरि
- मैत्री
- सम
- सक्रिय भाव
- बन्धु (4), धर्म (9), लाभ (11), धन (2), पुत्र (5), अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10)
- अनुकूल
- बन्धु, धर्म, लाभ, पुत्र, जाया, कर्म, भाग्य
- चुनौती
- अरि, रन्ध्र
उल्का–भद्रिका · दुर्बल
भद्रिका अन्तर्दशा उल्का महादशा (अकस्मात् विघ्न, श्रम, विलम्ब) में मंगल वाणी, विद्या, व्यापार जगाती है। स्वामी बुध — वाणी, विद्या, व्यापार, बुद्धि। बुध अरि राशि में है — फल रुकते या संघर्ष से आते हैं। दुःस्थान (६/८/१२) स्थिति रोग, विघ्न या व्यय बढ़ाती है। अस्त होने से दशा-स्वामी और दुर्बल। बुध धन (2), लाभ (11) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10), पुत्र (5)। महा–अन्तर सम्बन्ध सम। इस अवधि में वाणी-भ्रम, व्यापारी हानि। भार: धन, व्यय, अरि, जाया, रन्ध्र।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · उल्का–भद्रिका · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2033-07-13 – 2034-05-14
- महायोगिनी
- उल्का · स्वामी शनि · भाव 8 · सम
- अन्तयोगिनी
- भद्रिका · स्वामी बुध · भाव 12 · अरि
- मैत्री
- सम
- सक्रिय भाव
- धन (2), लाभ (11), व्यय (12), अरि (6), जाया (7), रन्ध्र (8), कर्म (10), पुत्र (5)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- धन, व्यय, अरि, जाया, रन्ध्र
सिद्धा–सिद्धा · दुर्बल
सिद्धा अन्तर्दशा सिद्धा महादशा (सिद्धि, कलत्र, सुख-भोग) में सिद्धि, कलत्र, सुख-भोग जगाती है। स्वामी शुक्र — कलत्र, सुख, वाहन, कला। शुक्र नीच है — अन्तर्दशा-फल विपरीत या कष्ट से आता है। शुक्र सहज (3), कर्म (10) का स्वामी है — उन्हीं भावों का फल पकता है। सक्रिय भाव सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8)। स्व अन्तर्दशा — महादशा-स्वामी का अपना फल तीव्र होता है। इस अवधि में कलत्र-कलह, भोग-व्यय। भार: रन्ध्र, नीच दशा-स्वामी।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · सिद्धा–सिद्धा · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2034-05-14 – 2035-09-23
- महायोगिनी
- सिद्धा · स्वामी शुक्र · भाव 2 · नीच
- अन्तयोगिनी
- सिद्धा · स्वामी शुक्र · भाव 2 · नीच
- मैत्री
- स्व अन्तर्दशा
- सक्रिय भाव
- सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8)
- अनुकूल
- —
- चुनौती
- रन्ध्र, नीच दशा-स्वामी
सिद्धा–संकटा · तनाव
संकटा अन्तर्दशा सिद्धा महादशा (सिद्धि, कलत्र, सुख-भोग) में संकट, विघ्न, छाया-मार्ग जगाती है। स्वामी राहु — विदेश, अकस्मात्, अपूर्व मार्ग। राहु भाव 7 में, सम। केन्द्र/त्रिकोण स्थिति फल को प्रकट करती है। सक्रिय भाव जाया (7), तनु (1), सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8)। राहु/केतु की राशि-स्वामित्व नहीं — स्थित भाव और राशि-स्वामी से फल देखें। इस अवधि में संकट, भ्रम, अचानक रुकावट। भार: रन्ध्र।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · योगिनी दशा · सिद्धा–संकटा · जातकपारिजात · फलदीपिका (बल/राशि)
- अवधि
- 2035-09-23 – 2037-04-13
- महायोगिनी
- सिद्धा · स्वामी शुक्र · भाव 2 · नीच
- अन्तयोगिनी
- संकटा · स्वामी राहु · भाव 7 · सम
- मैत्री
- —
- सक्रिय भाव
- जाया (7), तनु (1), सहज (3), कर्म (10), धन (2), रन्ध्र (8)
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- रन्ध्र
शास्त्र — बृहत्पाराशर होराशास्त्र
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